कोटा कोर्ट का बड़ा फैसला: हत्या के मामले में दस आरोपियों को उम्रकैद
आरोपियों ने सो रहे परिवार पर किया था हमला
कोटा की एससी-एसटी कोर्ट ने 7 साल पुराने अभिमन्यु हत्याकांड में 10 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साल 2019 में आपसी रंजिश के चलते आरोपियों ने घर में घुसकर गोली मारकर हत्या की थी। न्यायाधीश मनोज कुमार गोयल ने दोषियों पर 40,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अभियोजन पक्ष ने 40 गवाहों के जरिए जुर्म साबित किया।
कोटा । कोटा शहर की एससी एसटी कोर्ट ने गुरुवार को एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने के सात साल पुराने एक मामले में दस आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी मेघराज नागर (65) पुत्र गोबरीलाल, कुशराज नागर (34 ) व रामराज नागर (32)पुत्र मेघराज निवासी गलाना, दिनेश (35 )पुत्र नन्दकिशोर निवासी बपावर कलां, भगवान (45)पुत्र रामकुंवार निवासी श्यामपुरा, नवीन कुमार (44)पुत्र द्वारकीलाल निवासी बपावर कलां, ओमप्रकाश खाती (55)पुत्र मोहनलाल निवासी गलाना, हेमराज (53 )पुत्र रामचन्द्र निवासी गन्दीफनी, तीरथराज (37) पुत्र मेघराज धाकड़ निवासी मलाना तथा शेलेन्द्र उर्फ शेलू (25) पुत्र बालकिशन धाकड़, निवासी गन्दीफली, को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए चालीस हजार रुपए के अर्थ दंड से भी दंडित किया है।
विशिष्ट लोक अभियोजक रितेश मेवाड़ा ने बताया कि गलाना निवासी फरियादी पंकज बागरी पुत्र मथुरालाल बागरी ने 4 फरवरी 2019 को पुलिस थाना कैथून में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें बताया था कि 3 फरवरी 2019 की रात करीब 11 बजे वह और उसके परिवार के सदस्य घर पर सो रहे थे। उसी समय मेघराज नागर अपने अन्य साथियों के साथ फरियादी के घर के सामने से अपशब्द बोलते हुए निकले और गांव में ही एक स्थान पर एकत्रित हो गए। मेघराज नागर और उसका पुत्र तीरथराज, कुशवाह व रामराज अपने अन्य साथियों के साथ फरियादी के घर आ गए और एक साथ उन लोगो पर हमला कर परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मारपीट की। इस दौरान आरोपी तीरथराज ने फरियादी के चाचा अभिमन्यु पर गोली चला दी। इसके बाद आरोपियों ने मारपीट की और फरार हो गए। हमले में गंभीर रुप से घायल चाचा और पिता मथुरालाल को लेकर फरियादी अस्पताल पहुंचा तो वहां फरियादी के चाचा की मौत हो गई।
मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मारपीट, हत्या के प्रयास व हत्या सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। अनुसंधान के दौरान पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया और न्यायालय मे चालान पेश किया था। ट्रायल के दौरान कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से चालीस गवाहों के बयान दर्ज कराए और कई दस्तावेज पेश किए थे। न्यायाधीश मनोज कुमार गोयल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले दस आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाते हुए चालीस हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया है।

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