विकास के नाम पर खेजड़ी के वृक्षों पर चली आरी : दो गांवों की रोही में 50 से ज्यादा वृक्षों का सफाया, वन प्रेमियों में रोष
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से पर्यावरण संरक्षण पर सवाल खड़े
क्षेत्र में खेजड़ी जैसे पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण वृक्षों की कटाई का मामला सामने आया। कुंतासर और कितासर भाटियान गांवों की रोही में 50 से अधिक खेजड़ी के पेड़ काटे जाने से वन प्रेमियों में रोष। गत12 अप्रैल को कुंतासर की रोही में पेड़ काटने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
श्रीडूंगरगढ़। क्षेत्र में खेजड़ी जैसे पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण वृक्षों की कटाई का मामला सामने आया है। कुंतासर और कितासर भाटियान गांवों की रोही में 50 से अधिक खेजड़ी के पेड़ काटे जाने से वन प्रेमियों में रोष है। गत12 अप्रैल को कुंतासर की रोही में पेड़ काटने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। खसरा नंबर 32881 व 68900 में निरीक्षण के दौरान चार खेजड़ी के कटे पेड़ मिले। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि भूमि सुधार के लिए पेड़ काटे गए हैं, जबकि कुछ पेड़ पहले से सूखे हुए थे।
वहीं कितासर भाटियान के खसरा नंबर 746, 363, 747.363, 364 और 396 में 45 खेजड़ी के पेड़ कटे पाए गए। कुछ पेड़ों को जलाए जाने के भी प्रमाण मिले हैं। इन खसरों में करीब 150 पेड़ अभी भी सुरक्षित खड़े हैं, जिनमें 4.5 रोहिड़ा के शामिल हैं। खसरा नंबर 365 जो राजस्व रिकॉर्ड में बजरंग लाल के नाम दर्ज है, वहां भूमि समतलीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस क्षेत्र में 54 पेड़ सुरक्षित पाए गए, जिनमें 2 रोहिड़ा और शेष खेजड़ी के पेड़ हैं। कटे पेड़ों के अवशेष भी मौके पर मौजूद मिले हैं।
नियमों पर उठ रहे सवाल
एक ओर सरकार खेजड़ी जैसे वृक्षों की सुरक्षा को लेकर नियम बना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर इनका पालन नहीं होने से अवैध कटाई के मामले सामने आ रहे हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से पर्यावरण संरक्षण पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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