रसोई गैस पर माफिया का कब्जा : थड़ी-ढाबों में खप रहे घरेलू सिलेंडर, जनता की रसोई ठप
कई गुना ज्यादा वसूल रहे कीमत
घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी तेज, चाय-ढाबों में हो रहा अवैध उपयोग। कमर्शियल सिलेंडर की 30-35% सप्लाई से संकट गहराया। बाजार में सिलेंडर तीन-चार गुना महंगे बिक रहे, आमजन परेशान। प्रशासन ने 6 टीमें बनाकर सख्त कार्रवाई शुरू की। एजेंसियों ने सप्लाई कमी और निगरानी की जिम्मेदारी प्रशासन पर डाली।
जयपुर। आमजन की रसोई का आधार मानी जाने वाली घरेलू गैस आज कालाबाजारी की भेंट चढ़ रही है। बड़े पैमाने पर घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों का दुरुपयोग कर उन्हें चाय की थड़ियों, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जिसे समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। नियमों के अनुसार व्यवसायिक कार्यों के लिए कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके बावजूद कई छोटे-बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर घरेलू सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग हो रहा है। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि एजेंसी से घरेलू गैस उपभोक्ताओं को ही सप्लाई की जा रही है और मार्केट में इसका किसी प्रकार का दुरूपयोग होता है तो इसके लिए प्रशासन रोक लगाए।
कई गुना ज्यादा वसूल रहे कीमत
इसके लिए सिलेंडर मार्केट में तीन से चार गुना तक मंहगी दरों पर बेचा जा रहा है। इसका खामियाजा आमजन को उठाना पड़ रहा है। खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ गई है।
वाणिज्यक सिलेंडर की सप्लाई 30-35 फीसदी
एजेंसी संचालकों का कहना है कि वाणिज्यक सिलेंडरों की नियमित सप्लाई के स्थान पर करीब 30 से 35 प्रतिशत ही हो रही है। ऐसे में वह वाणिज्यक सिलेंडरों की सप्लाई नहीं दे पा रहे है। शादी विवाहों में भी वाणिज्यक सिलेंडरों की सप्लाईपर जिला रसद अधिकारी का कंट्रोल है। शहरी क्षेत्र में तीन और ग्रामीण में दो सिलेंडर डीएसओ को आवेदन करने पर दिए जा रहे हैं।
छह टीमें कर रहीं सख्त कार्रवाई
घरेलू गैस का वाणिज्यक उपयोग पूरी तरह गैर कानूनी है और इस पर नियमित रूप से कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए छह टीमों का गठन का जगह-जगह जांच की जा रही है और सूचना मिलने पर भी टीमें मौके पर भेजकर कठोर कार्रवाई की जा रही है।
-प्रियवृत सिंह चारण, जिला रसद अधिकार प्रथम जयपुर
गैस एजेंसियों पर सप्लाई पूरी तरह से प्रशासन की देख-रेख में हो रही है। घरेलू गैस का किसी भी प्रकार का दुरूपयोग हो रहा है तो उसके लिए प्रशासन जिम्मेदार है ना कि गैस एजेंसी संचालक। घरेलू गैस के उपलभोक्ताओं को ओटीपी के माध्यम से सप्लाई की रही है। वर्तमान में एचपीसी की सप्लाई करीब 45 प्रतिशत, बीपीसी और आईओसी की सप्लाई 25 प्रतिशत कम होने से भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
- दीपक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष, एलपीजी डिस्टीब्यूटर्स फैडरेशन आूफ राजस्थान

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