हाईकोर्ट का नीट पीजी काउंसलिंग पर अहम आदेश : अन्य राज्यों के आरक्षित अभ्यर्थियों को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, सीटें भरने के उद्देश्य से न्यूनतम योग्यता मानकों से नहीं किया जा सकता समझौता

कम किए गए क्वालिफाइंग परसेंटाइल का लाभ दिया जाए

हाईकोर्ट का नीट पीजी काउंसलिंग पर अहम आदेश : अन्य राज्यों के आरक्षित अभ्यर्थियों को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, सीटें भरने के उद्देश्य से न्यूनतम योग्यता मानकों से नहीं किया जा सकता समझौता

राजस्थान हाईकोर्ट ने नीट पीजी 2025-26 काउंसलिंग पर अहम फैसला देते हुए कहा कि दूसरे राज्यों के एससी, एसटी और ओबीसी अभ्यर्थियों को राज्य कोटा की आरक्षित सीटों का लाभ नहीं मिलेगा। कोर्ट ने फेडरेशन की याचिका खारिज कर स्पष्ट किया कि आरक्षण राज्यवार है, जबकि बाहरी अभ्यर्थी केवल सामान्य श्रेणी में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं ही अब।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संजीत पुरोहित की एकलपीठ ने नीट पीजी 2025-26 काउंसलिंग से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया, कि अन्य राज्यों के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को राजस्थान की राज्य कोटा सीटों पर आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने फेडरेशन ऑफ प्राइवेट मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज ऑफ राजस्थान की ओर से दायर याचिका को खारिज करते कहा, राज्यवार आरक्षण व्यवस्था संविधान और कानून के अनुरूप है और इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप आवश्यक नहीं है। फेडरेशन की ओर से याचिका में बताया गया, कि अन्य राज्यों के एससी,एसटी और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को भी राज्य कोटा की आरक्षित सीटों पर भाग लेने और कम किए गए क्वालिफाइंग परसेंटाइल का लाभ दिया जाए।

याचिकाकर्ता का तर्क था, कि केंद्र सरकार की ओर से सीटें खाली रहने के कारण क्वालिफाइंग परसेंटाइल कम किया गया है, ऐसे में सभी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को इसका समान लाभ मिलना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा, भारत के संविधान के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की पहचान राज्यवार होती है। ऐसे में एक राज्य में आरक्षित वर्ग में आने वाला व्यक्ति दूसरे राज्य में उसी श्रेणी का लाभ नहीं ले सकता। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया, कि राजस्थान सरकार की काउंसलिंग गाइडलाइन पहले से ही यह प्रावधान करती है कि अन्य राज्यों के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनारक्षित (जनरल) श्रेणी में ही माना जाएगा। यह नियम पूरे काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान लगातार लागू रहा है, इसलिए इसे बीच में बदला हुआ नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा, यह व्यवस्था 100 प्रतिशत डोमिसाइल आधारित आरक्षण नहीं है, क्योंकि अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को पूरी तरह बाहर नहीं किया गया है। उन्हें सामान्य श्रेणी की सीटों पर प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति है, बशर्ते वे उस श्रेणी के निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त करें। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी माना कि मेडिकल की पोस्टग्रेजुएट सीटों का खाली रहना उचित नहीं है, लेकिन केवल सीटें भरने के उद्देश्य से न्यूनतम योग्यता मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता।

Tags: court

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