कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर केंद्र पर बोला हमला : प्रतिनिधित्व पर दिए आश्वासनों पर उठाया सवाल, जनता को जानबूझकर धोखा देने का लगाया आरोप
परिसिमन विवाद: जयराम रमेश का केंद्र पर तीखा हमला
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र को 'धोखा' देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण और पूर्वी राज्यों का लोकसभा प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जो संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन है। रमेश ने इसे डॉ. अंबेडकर की विरासत का अपमान बताते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और सरकार पर जानबूझकर धोखा देने और संसदीय प्रतिनिधित्व पर पहले दिये गये आश्वासनों को कमजोर करने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर लिखे एक तीखे पोस्ट में, जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि परिसीमन पर केंद्र सरकार के दावों का आगामी संसद के विशेष सत्र के लिए प्रसारित विधेयकों में खंडन किया गया है।
उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार एकमात्र विशिष्ट विशेषता उनकी बेजोड़ भ्रामक नेतृत्व क्षमता वाली पार्टी है। उन्होंने परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र के साथ जानबूझकर छल किया है।” प्रस्तावित परिवर्तनों के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए, कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कई क्षेत्रों के लोकसभा में सापेक्ष प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा, “दक्षिणी राज्यों के सदस्यों की लोकसभा में संख्या कम हो जाएगी और इसी तरह की स्थिति उत्तर-पश्चिम भारत के छोटे राज्यों और पूर्वी राज्यों की भी है।” उन्होंने सरकार की विफलता पर सवाल उठाया, जो सभी राज्यों में सीटों में एक समान एवं आनुपातिक वृद्धि करने की अपनी पिछली प्रतिबद्धता का सम्मान करने में विफल रही।
जयराम रमेश ने कहा, “सभी राज्यों के लिए लोकसभा में समानुपातिक संख्या में वृद्धि का जो वादा केंद्र सरकार और उनके कुछ सहयोगियों ने किया था, उसका क्या हुआ? ऐसा नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आश्वासनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने सरकार पर संवैधानिक सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। जयराम रमेश ने कहा,“वह सत्ता हथियाने की अपनी अशिष्ट प्रवृत्ति से ऊपर उठकर एक राजनेता बनने में असमर्थ हैं यहां तक कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी।”
कांग्रेस ने इस कदम के समय पर भी आपत्ति दर्ज की और कहा कि विधेयक की प्रतियां डॉ बी.आर.अंबेडकर की जयंती पर अपलोड किये गये थे। जयराम रमेश ने परिसीमन प्रावधानों को बाबासाहेब की विरासत का अपमान करार दिया और 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा में डॉ अंबेडकर द्वारा संवैधानिक नैतिकता से मुक्त सरकार के खतरों के बारे में दी गयी चेतावनी का हवाला दिया। जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर संसद एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने की परिसीमन प्रक्रिया लंबे समय से एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रही है। इसका हालांकि उद्देश्य समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है लेकिन कई विपक्षी दलों, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों के दलों ने चिंता व्यक्त की है कि जनसंख्या आधारित समायोजन से क्षेत्रों के बीच सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है। सरकार का हालांकि कहना है कि परिसीमन संबंधी कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी, लेकिन संसद के विशेष सत्र से पहले यह मुद्दा विवाद का विषय बने रहने का अनुमान है।

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