दांडी मार्च में शामिल हुए अशोक गहलोत, वर्तमान राजनीतिक हालातों पर जताई चिंता
महात्मा गांधी के अहिंसक प्रतिरोध को याद किया
दांडी मार्च की 96वीं वर्षगांठ पर जयपुर में भारत सेवा संस्थान ने शहीद स्मारक से गांधी वाटिका तक पैदल मार्च। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नेतृत्व करते हुए गांधी के सत्य और अहिंसा के संदेश को याद। गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली, रफीक खान सहित कई नेता शामिल।
जयपुर। महात्मा गांधी के ऐतिहासिक दांडी मार्च की 96वीं वर्षगांठ पर भारत सेवा संस्थान द्वारा एक विशेष पैदल मार्च का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गांधीवादी मूल्यों, सत्य, अहिंसा और लोकतंत्र की रक्षा के संदेश को मजबूत करने के उद्देश्य से निकाला गया। मार्च शहीद स्मारक से शुरू होकर गांधी वाटिका तक पहुंचा, जहां प्रार्थना सभा के साथ समापन हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मौन शांति मार्च का नेतृत्व किया और इसमें शामिल होकर महात्मा गांधी के अहिंसक प्रतिरोध को याद किया।
गहलोत ने कहा कि दांडी मार्च अन्याय और दमनकारी नीतियों के खिलाफ दुनिया का सबसे बड़ा अहिंसक आंदोलन था। उन्होंने वर्तमान समय में लोकतंत्र पर चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है, न्यायपालिका और जांच एजेंसियां दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने गांधीवादी मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि आज के खतरनाक माहौल में सत्य-अहिंसा के संकल्प को और मजबूत करना होगा। मार्च में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली, विधायक रफीक खान सहित कई कांग्रेस नेता और गांधीवादी कार्यकर्ता शामिल हुए। नेताओं ने मौन रखते हुए मार्च किया। कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने बयान देते हुए वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी की। गहलोत ने सरकार की कुछ नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि न्याय अब सड़कों पर तलाशना पड़ रहा है। डोटासरा ने गांधीजी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही।

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