भीषण गर्मी में बढ़ेगी बिजली की मांग, 20 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है मई-जून में डिमांड 

बिजली संकट की हालत में ये उपाय करेगा ऊर्जा विभाग

भीषण गर्मी में बढ़ेगी बिजली की मांग, 20 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है मई-जून में डिमांड 

राजस्थान में इस साल के शुरुआती तीन महीनों में बिजली की मांग अपेक्षाकृत नियंत्रित रही, लेकिन अब गर्मी तेज पड़ने की स्थिति में अप्रैल से जून के बीच इसमें तेज बढ़ोतरी का अनुमान है।

जयपुर। राजस्थान में इस साल के शुरुआती तीन महीनों (जनवरी से मार्च) में बिजली की मांग अपेक्षाकृत नियंत्रित रही, लेकिन अब गर्मी तेज पड़ने की स्थिति में अप्रैल से जून के बीच इसमें तेज बढ़ोतरी का अनुमान है। जनवरी से मार्च के दौरान राज्य में औसत बिजली मांग 13,000 से 15,500 मेगावाट के बीच रही, जबकि पीक डिमांड करीब 16,000-17,000 मेगावाट तक रही। इस दौरान उपलब्ध सप्लाई 15,000 से 17,500 मेगावाट के बीच रखी गई। अब अनुमान है कि अप्रैल, मई और जून में बिजली मांग 17,000 से 19,500 मेगावाट के बीच पहुंच सकती है, जबकि पीक समय में यह 20,000 मेगावाट के करीब जा सकती है। इसके मुकाबले सप्लाई को 18,000 से 20,000 मेगावाट तक बनाए रखने की योजना है।

अब बढ़ेगी डिमांड
गर्मी के महीनों में घरेलू उपकरणों, एसी, कूलर, फ्रिज आदि का उपयोग बढ़ने से घरेलू उपभोक्ताओं की डिमांड बढ़ जाती है। कृषि में सिंचाई लोड बढ़ने और उद्योगों में उत्पादन तेज होने से यह उछाल आता है। हालांकि कृषि क्षेत्र में गर्मियों में सप्लाई का उतना लोड़ नहीं बढ़ता। औद्योगिक क्षेत्र में सीमेंट, खनन, टेक्सटाइल और धातु उद्योगों में उत्पादन बढ़ने से बिजली खपत अधिक रहने की संभावना है। इस बार गैस सिलेण्डर संकट के चलते प्रदेश के लोगों ने बड़ी संख्या में इंडक्शन भी खरीदे हैं और गेस सप्लाई प्रभावित होने पर इंडक्शन उपयोग से भी बिजली की डिमांड में बढ़ोतरी हो सकती है। 

बिजली संकट की हालत में ये उपाय करेगा ऊर्जा विभाग
ऊर्जा विभाग के अफसरों का कहना है कि गर्मी के महीनों में डिमांड बढ़ने की संभावना बनी हुई है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए पहले से ही अतिरिक्त बिजली खरीद, सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि और ग्रिड प्रबंधन को मजबूत किया गया है। अत्यधिक गर्मी या अचानक मांग बढ़ने की स्थिति में सीमित लोड मैनेजमेंट (कटौती) की संभावना से भी इंकार नहीं किया है। संभावित बिजली संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार और बिजली कंपनियों ने अतिरिक्त बिजली खरीद, रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन) का अधिकतम उपयोग, ट्रांसफॉर्मर और फीडर की मरम्मत तथा मांग प्रबंधन (लोड शेडिंग की वैकल्पिक योजना) पर जोर दिया है।  

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