जैसलमेर के नभ में स्वदेशी प्रचंड हेलिकॉप्टर में राष्ट्रपति ने भरी उड़ान, आसमान से निहारा सोनार किला और पोकरण स्थित शक्ति स्थल
रेडियो के जरिए देश के नाम संदेश
राष्ट्रपति और तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने जैसलमेर में रच दिया नया इतिहास। राष्ट्रपति ने भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड में करीब 25 मिनट तक उड़ान भरी। यह पहली बार है जब किसी राष्ट्रपति ने एक लड़ाकू हेलिकॉप्टर में को-पायलट के तौर पर उड़ान भरी।
जैसलमेर। राष्ट्रपति और तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को जैसलमेर में एक नया इतिहास रच दिया। राष्ट्रपति ने भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड में करीब 25 मिनट तक उड़ान भरी। यह पहली बार है जब किसी राष्ट्रपति ने एक लड़ाकू हेलिकॉप्टर में को-पायलट के तौर पर उड़ान भरी है। राष्ट्रपतिआर्मी कैंट से विशेष वायुसेना पायलट की कॉम्बैट ड्रेस पहनकर वायुसेना स्टेशन पहुंचीं। वहां उन्होंने अधिकारियों की सलामी ली और फिर प्रचंड के कॉकपिट में को-पायलट की सीट संभाली। उनके साथ दूसरे हेलिकॉप्टर में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी मौजूद रहे। जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर लैंडिंग के बाद राष्ट्रपति ने हाथ हिलाकर सभी का अभिवादन किया। उनके दौरे ने न केवल सेना के मनोबल को बढ़ाया है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की झलक भी पेश की है।
रेडियो के जरिए देश के नाम संदेश
करीब 25 मिनट के हवाई सफर के दौरान राष्ट्रपति ने जैसलमेर के ऐतिहासिक सोनार किले और पोकरण स्थित शक्ति स्थल को आसमान से देखा और नमन किया। इस दौरान उन्होंने रेडियो के जरिए देश के नाम एक विशेष संदेश भी साझा किया।
दौरे की खास बातें
ऐतिहासिक क्षण: किसी राष्ट्रपति की ओर से लड़ाकू हेलिकॉप्टर में को-पायलट के तौर पर पहली उड़ान।
स्वदेशी ताकत: प्रचंड हेलिकॉप्टर पूरी तरह से भारत में निर्मित है, जो वायुसेना की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।
विशेष संदेश: उड़ान के बाद राष्ट्रपति ने वायुसेना स्टेशन की गेस्ट बुक में भारतीय वायुसेना के शौर्य की सराहना करते संदेश लिखा।

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