सब-डर्मल इम्प्लांट इंसर्शन प्रशिक्षण सह कार्यशाला : आधुनिक गर्भनिरोधक सेवाओं को सुदृढ़ करना उद्देश्य, विशेषज्ञ हुए शामिल
स्वास्थ्य नवाचार: जोधपुर में सब-डर्मल इम्प्लांट प्रशिक्षण
उम्मेद अस्पताल में UNFPA और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आधुनिक गर्भनिरोधक सब-डर्मल इम्प्लांट पर कार्यशाला आयोजित हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि यह विधि तीन वर्षों तक सुरक्षित सुरक्षा देती है। जोधपुर में अब तक 1300 सफल इम्प्लांट हो चुके हैं। अब यह सुविधा जिला चिकित्सालय महिलाबाग में भी सुलभ होगी, जिससे परिवार नियोजन सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
जोधपुर। शहर के उम्मेद अस्पताल में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय सब-डर्मल इम्प्लांट इंसर्शन प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जिले में आधुनिक गर्भनिरोधक सेवाओं को सुदृढ़ करना और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाना रहा। इस प्रशिक्षण में उम्मेद अस्पताल, मथुरा दास माथुर अस्पताल, महिलाबाग जिला चिकित्सालय और एम्स जोधपुर के वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। साथ ही जैसलमेर जिले से भी विशेषज्ञ इस कार्यशाला में शामिल हुए।
प्रशिक्षण सत्रों का संचालन डॉ. ओबी नागर (जयपुर) और डॉ. संतोष खोखर (जोधपुर) ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। राज्य कार्यक्रम अधिकारी कृष्ण गोपाल सोनी ने एसडी इम्प्लांट की राज्य स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता के आंकड़े साझा किए, जबकि जिला स्तर पर समन्वय डॉ. गिरीश माथुर ने किया। कार्यशाला में बताया गया कि सब-डर्मल इम्प्लांट एक सुरक्षित, प्रभावी और दीर्घकालिक गर्भनिरोधक विधि है, जो महिलाओं को लगभग तीन वर्षों तक गर्भधारण से सुरक्षा देती है। इसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी द्वारा महिला की बांह में लगाया जाता है और प्रसव या गर्भपात के तुरंत बाद भी उपयोग किया जा सकता है। जोधपुर जिले में इस सुविधा की शुरुआत जनवरी 2025 में हुई थी और अब तक करीब 1300 सफल इम्प्लांट इंसर्शन किए जा चुके हैं। यह सेवाएं एम्स, उम्मेद अस्पताल, मथुरा दास माथुर अस्पताल और जिला चिकित्सालय पावटा में उपलब्ध हैं। अब महिलाबाग जिला चिकित्सालय में भी यह सुविधा शुरू की जा रही है, जिससे आमजन को और अधिक सुलभ सेवाएं मिल सकेंगी।

Comment List