मिडिल ईस्ट तनाव से महंगा हुआ तड़का, खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी से बिगड़ा बजट
शिपमेंट में देरी से सप्लाई हो रही प्रभावित
कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं, जिससे रोजाना नए दाम लागू हो रहे हैं।
कोटा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब सीधे आमजन की रसोई तक पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित होने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते खाद्य तेलों के दाम में अचानक उछाल आ गया है। पिछले कुछ दिनों में रिफाइंड तेल 15 से 20 रुपए प्रति किलो तक महंगा हो गया है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है। व्यापारियों के अनुसार भारत में सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होता है। मिडिल ईस्ट और आसपास के क्षेत्रों में अस्थिरता के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है, जिससे बाजार में सप्लाई घट गई है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। पाम आॅयल, जो सस्ता विकल्प माना जाता है, उसके दाम भी बढ़ने लगे हैं।
आमजन की जेब पर बढ़ा बोझ
गृहिणियों का कहना है कि खाद्य तेल हर घर की जरूरत है, ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से पूरे महीने का बजट गड़बड़ा गया है। कई परिवार अब तेल की खपत कम करने या सस्ते विकल्प तलाशने को मजबूर हैं। काफी समय से खाद्य तेल की कीमत होने से तरह-तरह के पकवानों का स्वाद लिया जा रहा था। अब अचानक से दामों में तेजी आने से घरेलू बजट गड़बड़ाने लगा है। खाद्य तेलों के बिना कोई सा भी पकवान नहीं बन सकता है। अब कीमत बढ़ने से खर्चा अधिक होने लगा है। सरकार को खाद्य तेलों की कीमत को कम करने के लिए वैकल्पिक उपाय करने चाहिए।
स्थानीय बाजार में दिख रहा असर
कोटा के थोक और खुदरा बाजारों में तेल की कीमतों में तेजी साफ नजर आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं, जिससे रोजाना नए दाम लागू हो रहे हैं। कुछ जगहों पर उपभोक्ताओं ने ज्यादा खरीदारी शुरू कर दी है, जिससे मांग और बढ़ गई है। वहीं होटल और ढाबा संचालकों पर भी इसका असर पड़ा है, जहां लागत बढ़ने के कारण या तो कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं या मुनाफा कम करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है तो खाद्य तेलों की कीमतों में और उछाल आ सकता है।
पहले ही सब्जियां और राशन महंगा है, अब तेल भी महंगा हो गया। हर महीने का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। हमें अब खाने में तेल कम करना पड़ रहा है।
-सीमा शर्मा, गृहिणी
कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं। हर 2-3 दिन में नए दाम आ जाते हैं। ग्राहक भी परेशान हैं और हमारी बिक्री पर भी असर पड़ रहा है।
-राजेश अग्रवाल, दुकानदार
तेल महंगा होने से लागत बढ़ गई है। अगर खाने के दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक कम हो जाते हैं, नहीं बढ़ाते तो मुनाफा खत्म हो जाता है।
-इमरान खान, ढाबा संचालक
रिफाइंड तेल के 15 किलो के पीपे में 200 से 250 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं मूंगफली और सरसों के तेल में भी 50 से 70 रुपए तक की तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण सप्लाई प्रभावित है।
-गजेन्द्र गर्ग, थोक व्यापारी

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