अब फिर उगेंगे टूटे दांत : जापान में वैज्ञानिकों ने शुरू किया परीक्षण, जानें कब आम लोगों के लिए उपलब्ध हो सकती है तकनीक
चूहों और कुत्तों में दांत उगाने में मिली सफलता
वैज्ञानिकों ने ऐसी दवा पर मानव परीक्षण शुरू किया है, जो टूटे या गायब दांत दोबारा उगा सकती है। यह USAG-1 प्रोटीन को ब्लॉक कर ‘टूथ बड्स’ सक्रिय करती है। जानवरों पर सफलता के बाद क्योटो में ट्रायल जारी हैं। नतीजे सकारात्मक रहे तो 2030 तक डेंचर-इम्प्लांट का विकल्प बदल सकता है।
टोक्यो। जापान के वैज्ञानिकों ने दांतों की दवा पर मानव परीक्षण शुरू किया है, जो भविष्य में टूटे या गायब दांतों को दोबारा उगा सकती है। इससे लोगों को डेंचर और इम्प्लांट जैसे विकल्पों पर निर्भरता कम करनी पड़ सकती है। यह दवा शरीर में मौजूद निष्क्रिय ‘टूथ बड्स’ को सक्रिय कर प्राकृतिक तरीके से नए दांत विकसित करने में मदद करती है। यदि परीक्षण सफल रहे, तो यह तकनीक 2030 तक आम लोगों के लिए उपलब्ध हो सकती है।
इस शोध में USAG-1 नामक प्रोटीन को ब्लॉक किया जाता है, जो आमतौर पर नए दांत बनने से रोकता है। वैज्ञानिकों ने एंटीबॉडी की मदद से इस प्रोटीन को ब्लॉक कर चूहों और कुत्तों में दांत उगाने में सफलता हासिल की है। क्योटो यूनिवर्सिटी अस्पताल में 2024 के अंत से 30 से 64 वर्ष के लोगों पर ट्रायल जारी है, जिनके शुरुआती नतीजे उत्साहजनक और सुरक्षित बताए जा रहे हैं। अब बच्चों पर भी इसका परीक्षण करने की योजना है, जो दंत चिकित्सा में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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