हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में गश्त की योजनाओं से पीछे हटने पर ट्रंप ने सहयोगी देशों पर जताई नाराजगी, बोले-ईरान के साथ जल्द हो सकता है खत्म संघर्ष
हॉर्मुज संकट: ट्रंप की सहयोगियों को फटकार, गठबंधन पर संशय
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए सहयोगियों की "सुस्ती" पर नाराजगी जताई है। उन्होंने ब्रिटेन और जर्मनी के हिचकिचाते रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए इन देशों को खुद आगे आना चाहिए। ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म होने का दावा किया, लेकिन त्वरित समाधान की संभावना से इनकार किया।
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों की आलोचना करते हुए कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने जिस गठबंधन का प्रस्ताव रखा है, उसके प्रति सहयोगियों में उत्साह की कमी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से ही दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के पाँचवें हिस्से की ज़हाज़ों से जरिये आपूर्ति की जाती है।
ट्रंप ने सोमवार देर रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस हफ़्ते किसी समाधान की संभावना कम है। उन्होंने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह जरूरी था।
ट्रंप ने कहा, यह अभियान जल्द ही खत्म हो जाएगा। हमारी दुनिया कहीं ज्यादा सुरक्षित होगी। गौरतलब है कि ईरान ने 28 फऱवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी थी जिसके बाद फ़ारस की खाड़ी से होने वाली ज़हाज़ों की आवाजाही काफ़ी हद तक कम हो गई है।
ट्रंप ने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए कहा, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा इस संघर्ष में नाटो को शामिल करने में दिखाई गई हिचकिचाहट से मैं खुश नहीं हैं और बहुत हैरान हूँ। मैं ब्रिटेन के रवैये से खुश नहीं था। मुझे लगता है कि शायद वे इसमें शामिल होंगे, लेकिन उन्हें पूरे उत्साह के साथ शामिल होना चाहिए।
कई सहयोगियों ने पहले ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आह्वान पर अपनी नाराजगी ज़ाहिर कर दी है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने सोमवार देर रात संकेत दिया कि उनका देश फ़ारस की खाड़ी में स्थित इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर गश्त करने में शामिल नहीं हो सकता है। बर्लिन में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, हमारे पास संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ या नाटो से जरूरी जनादेश नहीं है, जो हमारे मूल कानून के तहत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध शुरू करने से पहले अमेरिका और इजरायल ने जर्मनी से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया था।
इससे पहले, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा था कि ब्रिटेन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को साफ़ करने के लिए बारूदी सुरंगों का पता लगाने वाले ड्रोन के इस्तेमाल की संभावना पर चर्चा कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ब्रिटेन के युद्ध क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजने की संभावना कम ही है। अमेरिका के दो और अहम सहयोगी, जापान और ऑस्ट्रेलिया, ने भी सोमवार को संकेत दिया कि वे विवादित होर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त के लिए नौसैनिक ज़हाज़ भेजने को शायद तैयार न हों। यह बात तब सामने आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि अमेरिका खाड़ी के तेल पर निर्भर सात देशों से बात कर रहा है ताकि इस संकरे लेकिन रणनीतिक समुद्री गलियारे में ज़हाज़ों की सुरक्षा में मदद मिल सके।
ट्रंप ने रविवार को एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि इस संकरे जलमार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक ज़हाज़ों की सुरक्षा में मदद के लिए कई सरकारों से संपर्क किया गया है। हालांकि, ट्रंप ने उन देशों के नाम नहीं बताए, लेकिन शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश, जो इस कृत्रिम बाधा से प्रभावित हैं, इस अहम जलडमरूमध्य में गश्त के लिए ज़हाज़ भेजेंगे।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, मैं मांग कर रहा हूं कि ये देश आगे आएं और अपने ही क्षेत्र की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है उन्हें मिलकर काम करना चाहिए, क्योंकि उन्हें अपनी ऊर्जा इसी क्षेत्र से मिलती है।

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