अमेरिका-इजराइल v/s ईरान: महायुद्ध का 5वां दिन; ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी पनडुब्बी का हमला, सौ लोगों की मौत, कई लोग लापता

सीनेट में प्रस्ताव खारिज: ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर ट्रंप को खुली छूट

अमेरिका-इजराइल v/s ईरान: महायुद्ध का 5वां दिन; ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी पनडुब्बी का हमला, सौ लोगों की मौत, कई लोग लापता

अमेरिकी सीनेट में राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला वॉर पावर्स रेजोल्यूशन 47-53 के अंतर से गिर गया है। रिपब्लिकन बहुमत के समर्थन से डोनाल्ड ट्रंप अब कांग्रेस की पूर्व मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ बड़े ऑपरेशन कर सकेंगे। सीनेटरों ने परमाणु कार्यक्रम रोकने को प्राथमिकता दी, जिससे मध्य पूर्व में संघर्ष और खिंचने की संभावना बढ़ गई है।

नई दिल्ली। अमेरिका ने बुधवार को श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत पर पनडुब्बी से हमला किया। इस हमले में 100 लोगों के मारे जाने की खबर है। श्रीलंका नेवी के मुताबिक जहाज से कई शव बरामद हुए हैं।  जहाज पर लगभग 180 लोग सवार थे। हमले में 32 लोग घायल हैं, जिन्हें रेस्क्यू किया गया है। श्रीलंका ने लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया है। यह ईरानी युद्धपोत पिछले महीने भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित 2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेकर लौट रहा था।

ईरानी जहाज से मिला था संकट का संदेश

श्रीलंका रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें ईरानी जहाज से संकट का संकेत मिला था। इसके बाद श्रीलंकाई सेना ने बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया है।

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इजराइल के रक्षा मंत्री इजरायल कार्टज ने कहा है कि  ईरान में नियुक्त ऐसा कोई भी नया नेता, जो उनके देश को नष्ट करने की योजनाओं को आगे बढ़ाएगा, उसे सीधा निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसका नाम क्या है? कार्ट्स का यह बयान तब आया जब मीडिया में दावा किया गया कि ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने खामेनेई के पुत्र मुजतबा खामेनेई को इस्लामिक गणराज्य का नया सर्वोच्च नेता चुन लिया है। 

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ईरान पर इजरायल का दसवां बड़ा हमला, लेबनान में भी भारी बमबारी

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इजरायल ने बुधवार को युद्ध के पांचवे दिन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करते हुए ‘दसवें दौर’ के हमलों की शुरुआत कर दी। इसके साथ ही इजरायली सेना लेबनान में भी लगातार बमबारी कर रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि उनकी फौजों के हमलों से ईरान की वायुसेना और नौसेना पूरी तरह ‘ध्वस्त’ हो गई है। इजरायली रक्षा बलों ने दावा किया है कि दसवें दौर के हमले में तेहरान के दर्जनों इलाकों को निशाना बनाया गया। इसमें ईरान के सुरक्षा बल रिवोल्यूशरी गार्ड के हेडक्वार्टर बासिज पर भी हमला किया गया। अमेरिकी सैन्य सूत्रों के अनुसार, अब तक की कार्रवाई में ईरान के 17 जहाजों और लगभग 2,000 लक्ष्यों को नष्ट कर दिया गया है।

ईरान में अब तक 1,000 से अधिक लोग मारे गए

‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इजराइली फौजें लेबनान में सीमा से आगे छह किलोमीटर तक प्रवेश कर चुकी हैं। लेबनान के मीडिया के अनुसार इजरायली तोपों अभी भी गरज रही हैं। लेबनान के दक्षिण इलाके में सक्रिय आतंकी संगठन हिजबुल्ला ने दावा किया है कि उसने इजराइल के सेना मुख्यालय को निशाना बनाया है।

यूएई ने पड़ोसी देशों के साथ ‘सुरक्षित हवाई गलियारे’ खोले

पश्चिम एशिया के इस क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका ने तीन देशों में अपने दूतावास बंद कर दिए हैं और अपने राजनयिक कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है। संयुक्त अरब अमीरात ने फंसे हुए नागरिकों को निकालने के लिए पड़ोसी देशों के साथ ‘सुरक्षित हवाई गलियारे’ खोल दिए हैं।

तुर्की का बड़ा दावा  : ईरान की मिसाइल को बीच रास्ते में मार गिराया

तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि नाटो की हवाई रक्षा इकाइयों ने ईरान की ओर से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को बीच हवा में ही नष्ट कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, यह मिसाइल तुर्की के हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रही थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार नष्ट की गई मिसाइल का एक हिस्सा भूमध्य सागर के पास तुर्की के डोर्टयोल जिले में गिरा, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि तुर्की अपने क्षेत्र और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह सक्षम है, चाहे खतरा कहीं से भी आए। मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा, हम याद दिलाते हैं कि हम अपने देश के प्रति किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्य का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं। इसके साथ ही तुर्की ने सभी पक्षों से ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आग्रह किया है जिससे क्षेत्र में संघर्ष और अधिक फैल सके। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इस घटना के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को फोन कर अंकारा के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

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