आत्मनिर्भर भारत

आत्मनिर्भर भारत

मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत का नारा दे रखा है और इसके तहत ही बाहर से मंगाई जाने वाली कई वस्तुओं में कटौती भी कर चुकी है।

मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत का नारा दे रखा है और इसके तहत ही बाहर से मंगाई जाने वाली कई वस्तुओं में कटौती भी कर चुकी है। इसी क्रम में अब वाणिज्य मंत्रालय ने कुछ ऐसी वस्तुओं की पहचान की है जिनका उत्पादन अपने देश में ही बढ़ाया जा सकता है। इसीलिए इन चीजों को धीरे-धीरे बाहरी देशों से मंगवाने की प्रक्रिया बंद की जानी चाहिए। वाणिज्य मंत्रालय ऐसी 102 वस्तुओं की सूची जारी की है और संबंधित मंत्रालयों को इनके आयात में कटौती करने को कहा है। गौरतलब है कि इन 102 वस्तुओं की देश के कुल आयात में भागीदारी 57 फीसदी से अधिक है। इनमें से 18 वस्तुएं ऐसी हैं, जिनका आयात लगातार बढ़ रहा है। जबकि देश में उनके उत्पादन की भरपूर संभावनाएं हैं। जिन वस्तुओं के आयात में कटौती की सलाह दी गई है, वे मुख्य रूप से कोकिंग कोयला, कुछ मशीनरी उपकरण, रसायन और डिजिटल कैमरा शामिल हैं। कुछ वस्तुएं ऐसी हैं, जिनका अपने देश में भी भरपूर उत्पादन होता है, मगर आयातित माल की वजह से उन्हें घरेलू बाजार में उचित भागीदारी नहीं मिल पाती। जबकि सरकार ने स्वदेशी वस्तुओं को प्रोत्साहन व प्राथमिकता देने पर जोर दे रखा है। काफी संख्या में लोगों ने ‘मेड इन चाइन’ वस्तुओं की खरीद लगभग बंद कर दी हैं। जब हम निजी कंप्यूटर, पाम आॅयल, सूरजमुखी का तेल, यूरिया, फास्फोरिक एसिड आदि वस्तुएं अपने देश में बनाने की क्षमता रखते हैं और उत्पादन भी कर रहे हैं तो इनका आयात करना देश के लिए ही घाटे का सौदा है। फिर हम भारत को आत्मनिर्भर कैसे बना सकते हैं। काफी समय से इस बात को लेकर चिंता जताई जाती रही है कि देश में आयात तो बढ़ रहा है और निर्यात लगातार घट रहा है। आयात बढ़ने का सीधा अर्थ है कि देश में विदेशी कंपनियों का दखल बढ़ना। निर्यात न बढ़ने से घरेलू उत्पादकों पर दोहरी मार पड़ती है। उन्हें विदेशी बाजार में जगह नहीं मिल पाती और घरेलू बाजार में विदेशी वस्तुओं का बोलबाला बढ़ने से उन्हें अपने बाजार से प्रोत्साहन नहीं मिल पाता। भारत में ऐसी मानसिकता बढ़ गई है कि लोग ही नहीं सरकारों को भी विदेशों से सामान मंगवाना आसान लगता है। आज कुछ विदेशी कंपनियों ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। उनकी वस्तुएं सस्ती और गुणवत्ता पूर्ण होती है। भारतीय उत्पादकों को भी इस व्यापार नीति पर गौर करना चाहिए। हालात से निपटने के लिए कमर कस कर विदेशी ब्रांडों को मात दी जानी चाहिए। सरकार को आयात घटाने व निर्यात बढ़ाने के लिए अपनी नीतियों में भी बदलाव करने की जरूरत है।

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