त्वचा रोग विशेषज्ञों का मंथन शुरू

कॉन्टेक्ट एंड ऑक्यूपेशनल डर्मेटोसिस फोरम ऑफ  इंडिया का 12वां राष्ट्रिय सम्मेलन

त्वचा रोग विशेषज्ञों का मंथन शुरू

इसमें खेत खलिहानों में उग रहे पार्थिनियम घास द्वारा उत्पन्न एलर्जी, बालों में लगाने वाले कलर, चिपकने वाली बिंदी और रबड़ की चप्पलों एव हाथ में लगाने वाली मेहंदी के वजह से उत्पन्न बीमारियों के बारे में चर्चा हुई।

जयपुर। त्वचा रोग चिकित्सकों के कॉन्टेक्ट एंड ऑक्यूपेशनल डर्मेटोसिस फोरम ऑफ इंडिया के 12वें राष्ट्रिय सम्मेलन की शुरुआत गुरुकुल सत्र नामक कार्यक्रम से हुई। कार्यक्रम में राजीव गांधी हेल्थ यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. सचिदानंद, वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एसआर शुक्ल, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एसएस अग्रवाल, डॉ. दिनेश माथुर एवं दुबई के डॉ. महावीर मेहता, डॉ. यूएस अग्रवाल. डॉ. दीपक माथुर ने दीप प्रज्जवल्लन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। भारतीय पारम्परिक परिधानों में सुसज्जित चिकित्सकों ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए, जिसमें डॉ. आरए बम्ब ने योग के बारे में मिथक धारणा स्पष्ट की। आयुर्वेद आचार्य डॉ. अजय शर्मा, प्राकतिक चिकित्सक डॉ. उमेश, डॉ. तनुज राजवंशी, आधुनिक चिकित्सा पर डॉ. मनीष राजपूत ने व्याख्यान दिए। 

 300 चिकित्सक ले रहे हैं भाग 300 चिकित्सक ले रहे हैं भाग

आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश माथुर ने बताया सम्मलेन में 300 चिकित्सक भाग ले रहे हैं और सम्मलेन में सम्पर्क जनित त्वचा रोगों की एलर्जी के बारे में मंथन हुआ। इसमें खेत खलिहानों में उग रहे पार्थिनियम घास द्वारा उत्पन्न एलर्जी, बालों में लगाने वाले कलर, चिपकने वाली बिंदी और रबड़ की चप्पलों एव हाथ में लगाने वाली मेहंदी के वजह से उत्पन्न बीमारियों के बारे में चर्चा हुई। इस अवसर पर विश्व नेचुरोपैथी दिवस पर तैयार किए गए पोस्टर का एवं डॉ. इफ्फत हस्सान द्वारा तैयार किए गए न्यूज पत्र का विमोचन हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रचिता माथुर एवं शिवि निझावन ने किया। आयोजन सचिव डॉ. सरोज पुरोहित ने आगुन्तकों का सम्मान किया और डॉ. मनीषा निझावन ने स्मृति चिन्ह भेट किए।

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