जब बजट ही नहीं हो कैसे होंगे हमारे वार्ड में विकास कार्य

निगम और न्यास के बीच पिस रहे वार्ड 37 के लोग

जब बजट ही नहीं हो कैसे होंगे हमारे वार्ड में विकास कार्य

लोगों ने कहा कि बारिश के मौसम के कई दिनों बाद तक क्षेत्र में स्थित कई खाली प्लॉट में पानी भरा रहता है। जिसकी शिकायत वे निगम और न्यास दोनों को करते आए हैं लेकिन कई सुनवाई नहीं होती। लोगों को मौसमी बीमारियों का सामना करना पड़ता हैं।

कोटा। नगर निगम दक्षिण बनने के बाद जो वार्ड निगम और न्यास के बीच फुटबाल बने हुए हैं उनमें दक्षिण का वार्ड नम्बर 37 भी है। वार्डवासी तो दूर की बात खुद वार्ड के पार्षद ही कह रहे है कि हम ना इधर के हैं और ना उधर के। दरअसल वार्ड का कुछ हिस्सा नगर निगम दक्षिण में आता है तो कुछ भाग न्यास के अधीन। यहीं कारण है कि करीब तीन साल के बाद भी इस वार्ड में कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ है। वार्ड पार्षद की माने तो अब तक उनके वार्ड के विकास के लिए एक रूपए का भी बजट स्वीकृत नहीं हुआ है। अब जब बजट ही ना हो तो विकास कैसे होगा? नगर निगम दक्षिण के इस वार्ड में मानव सेवा समिति, गोबरिया बावड़ी कच्ची बस्ती, महावीर नगर प्रथम का कुछ भाग, ट्रांसपोर्ट नगर तथा स्काई पार्क बिल्डिंग के सामने वाला दीनदयाल नगर का हिस्सा आदि इलाकें आते हैं। वार्ड के लोग बताते हैं कि इस न्यास और निगम के चक्कर में कभी कभी तो ऐसा लगता है कि हम कोटा के नहीं किसी दूसरे शहर के लोग है। समस्याओं को लेकर किसके पास जाए। लोगों ने कहा कि बारिश के मौसम के कई दिनों बाद तक क्षेत्र में स्थित कई खाली प्लॉट में पानी भरा रहता है। जिसकी शिकायत वे निगम और न्यास दोनों को करते आए हैं लेकिन कई सुनवाई नहीं होती। लोगों को मौसमी बीमारियों का सामना करना पड़ता हैं। 

वार्ड के कुछ लोगों को कहना है कि वार्ड में छोटे-मोटे काम जरूर हुए हैं लेकिन ऐसा कोई काम नहीं हुआ है जिसे विकास कार्य के नाम पर गिनाया जा सके। साफ-सफाई हो रही है लेकिन नालियों की समस्या जस की तस बनी हुई हंै। पार्षद को कहते हैं तो जवाब मिलता है कि जब बजट ही नहीं तो काम कहा से होगा। ना वार्ड के उद्यानों की सुध ली जा रही है ना सड़Þकों के किनारे की ओर ध्यान दिया जा रहा है। रही सही कसर, सीवरेज की लाइन के काम ने पूरा कर दी। सड़कें खोदकर लाइन डाली गई लेकिन उनमें आज तक कनेक्शन नहीं हुआ है। वार्ड के कई स्थानों के हालात बताते है कि वार्डवासी दो दंश झेल रहे हैं। एक पार्षद के भाजपा के होने का और दूसरा निगम और न्यास के बीच में फंसा होने का। लोग बताते हैं कि वार्ड में आवारा जानवरों और श्वानों की भरमार हैं। वार्ड के कई हिस्सों में कोचिंग छात्रों का आना-जाना लगा रहता हंै। इसलिए प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी लगे होने चाहिए लेकिन नहीं है। वार्ड के कई हिस्सों में देर रात तक असामाजिक प्रवृति के लोग घूमते रहते हैं। पार्षद को भी कहे तो क्या, उनकी खुद की सुनवाई ना निगम में होती है ना न्यास में। 

वार्ड पार्षद बताते है कि भाजपा का होने के कारण वार्ड के लिए कोई बजट स्वीकृत नहीं किया गया है। विकास कार्य के नाम पर एक ईट तक नहीं लगाई गई हैं। जो कार्य बताएं जाते हैं उनके लिए बजट ही स्वीकृत नहीं किया जाता है। कलक्टर, स्वायत्तशासन मंत्री शान्ति धारीवाल, नगर निगम आयुक्त तथा यूआईटी सचिव सभी को लिखित रूप में अवगत करवा चुका हूं लेकिन कोई क्या कहता है और कोई क्या। बिना पैसों के वार्ड में विकास कार्य कैसे होंगे।

इनका कहना है
क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या गोबरिया बावड़ी चौराहा पर तोड़ी गई बस्ती की है जिसका कोई समाधान नहीं हो सका है। लोगों ने स्टे लिया हुआ है। वार्ड में जो थोड़े-बहुत काम, मसलन साफ-सफाई रोड लाइट ठीक करवाना आदि मैं करवा सकता हंू, करवाएं ही हैं। आवारा मवेशियों की बहुत भारी समस्या है जिसका समाधान नहीं हुआ हैं। 
-विनय कुमार, वार्ड पार्षद। 

वार्ड के पार्कों की सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। दीवारें जर्जर हो चुकी है। सीवरेज वालों ने सड़कों की हालात खराब करके रख दी है। पार्षद के हाथ में ही जब कुछ नहीं है तो उन्हे भी क्या कहे। जितना हो सकता है वो कर रहे है। गलियों में श्वानों की बहुत समस्या है। बजट ही नहीं है तो काम होने का सवाल ही नहीं। 
-सुमेरसिंह राणा, वार्डवासी। 

वार्ड में कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। पहले आवारा मवेशियों की संख्या बहुत ज्यादा थी लेकिन बीते कुछ दिनों से कम ही नजर आ रहे हैं। सीवरेज के चक्कर में रोड खोदी गई जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। पार्षद अपने हिसाब से भागदौड़ कर रहे है। फोन करते ही आ जाते हैं। 
-पवन शर्मा, वार्डवासी। 

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