टूटे फूटे छलकते टैंकर बन रहे जी का जंजाल

निगम में गिनती के पानी टैंकर, वह भी खस्ताहाल

टूटे फूटे छलकते टैंकर बन रहे जी का जंजाल

नगर निम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में जहां करीब 15 लाख से अधिक की आबादी है। उस निगम में मात्र 9 ही पानी के टैंकर हैं। इनमें से कोटा दक्षिण में 4 व कोटा उत्तर में 5 टैंकर हैं। दोनों निगमों के पास आबादी व शहर के हिसाब से न तो पर्याप्त पानी के टैंकर हैं। जो हैं उनमें से भी अधिकतर की हालत इतनी अधिक खराब है कि उनमें से पानी रिसता ही रहता है।

कोटा। नगर निगम के दोनों बोर्ड बने दो साल से अधिक हो गए। दो साल में निगम में सफाई समेत करोड़ों रुपए के वाहन व संसाधन खरीदे जा चुके हैं। लेकिन जिन पानी के टैंकरों की जरूरत है वही नहीं खरीदे गए हैं। शहर के विकास व विस्तार को देखते हुए परिसीमन के बाद कोटा में दो नगर निगम तो बना दिए। दोनों निगमों में दो साल में सफाई समेत अन्य वाहन व संसाधनों की इतनी अधिक भरमार हो गई है कि उन्हें सही ढंग से रखने कीे जगह तक नहीं है। निगम में सबसे अधिक जरूरत पानी के टैंकरों की है। हर साल गर्मी के समय हो या जल संकट होने पर वार्डों में पानी की सप्लाई का मामला। जलदाय विभाग के साथ ही नगर निगम द्वारा भी गैराज से टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई की जाती है। लेकिन हालत यह है कि दोनों निगमों के पास आबादी व शहर के हिसाब से न तो पर्याप्त पानी के टैंकर हैं। जो हैं उनमें से भी अधिकतर की हालत इतनी अधिक खराब है कि उनमें से पानी रिसता ही रहता है। गैराज से पानी भरकर निकलने वाले टैंकर गंतव्य स्थान तक पहुंचते-पहुंचते करीब 10 से 20 फीसदी तक व्यर्थ पानी बहाकर खाली हो जाते हैं। जिससे पानी की बर्बादी तो हो ही रही है साथ ही जहां जितना पानी पहुंचना चाहिए वहां उतना पानी नहं पहुंच पा रहा है। इतना ही नहीं शहर में पानी की किल्लत होने पर एक साथ कई जगह पर विशेष रूप से दूरदराज के इलाकं में पानी पहुंचाना हो तो कम टैंकरों के कारण न तो सभी जगह पानी पहुंच पाता है और न ही समय पर पहुंच पाता है। जिससे हाहाकार मचने के साथ ही लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। 

दोनों निगम में मात्र 9 टैंकर
नगर निम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में जहां करीब 15 लाख से अधिक की आबादी है। उस निगम में मात्र 9 ही पानी के टैंकर हैं। इनमें से कोटा दक्षिण में 4 व कोटा उत्तर में 5 टैंकर हैं।  इन टैंकरों की क्षमता 25 सौ से 3 हजार लीटर की है। स्टील और लोहे के इन टैंकरों में से स्टील के टैंकर तो अपेक्षाकृत कुछ सही हैं। जबकि लोहे के टैंकरों की हालत अधिक खराब है। उनमें पानी भरन का मलतब लीकेज होना ही है। वहीं दोनों निगमों में एक-एक प्रेशर वाले टैंकर हैं। जिससे ऊपरी मंजिल पर पानी पहुंचाया जाता है। उनकी हालत भी खराब है। निगम में पानी के टैंकरों को जरूरत होने के बावजूद काफी समय से नए टैंकर ही नहीं खरीदे गए हैं। 

गर्मियों में होगी परेशानी
तीन महीने बाद फिर से गर्मी का मौसम शुरू हो जाएगा। जिसमें शहर में टैंकरों से पानी सप्लाई  किया जाएगा। उस समय में फिर से उसी परेशानी का सामना करना पड़ेगा जिसका वतँमान में करना पड़ रहा है। नगर निगम के अधिकारियों का नए टैंकर खरीदने पर ध्यान ही नहीं है। जबकि निगम में बिना जरूरत के ही करोड़ों रुपए की ऐसी मशीनरी खरीदी जा चुकी हैं जिनका अभी तक तो उपयोग ही नहीं हुआ है।  कोटा उत्तर निगम में 70 व कोटा दक्षिण में 80 वार्ड हैं। जिनमें से करीब 10 से 20 फीसदी वार्ड ऐसे हैं जहां हर बार गर्मी में पानी की किल्लत रहती है। वहां न तो पाइप लाइन हैं और न ही जलदाय विभाग द्वारा पर्याप्त पानी पहुचाया जाता है। ऐसे में निगम  पर ही दबाव रहता है। ऐसे में प्रभावशाली व्यक्ति उन गिनती के टैंकरों का उपयोग कर लेते हैं बाकी अधिकतर लोगपरेशान ही होते रहते हैं। 

प्राइवेट टैंकर महंगा 
गर्मी में पानी की किल्लत होने पर जलदाय विभाग व नगर निगम के टैंकर कम पड़ने पर कई बस्तियों में लोगों को प्राइवेट टैंकर मंगवाकर महंगे दामों पर खरीदकर पानी पीना पड़ता है। प्रेम नगर निवासी जगदीश सिंह का कहना है कि एक टैंकर 500 से 1 हजार रूपए तक में मिलता है। वह भी पर्याप्त नहीं रहता। वह कुछ ही लोगों तक पहुच पाता है। बस्ती के लोग गरीब होने से अधिक खर्चा भी नहीं कर पाते हैं। आंवली रोजड़ी निवासी रामेश्वर गुजर का कहना है कि इस क्षेत्र में पाइप लाइन नहीं होने से जलदाय विभाग टैंकर से पानी की सप्लाई करता है। लेकिन वहां तक टैंकर आने में समय अधिक लगता है। तब तक तो लोग परेशान होते रहते हैं। पार्षदों से कहकर निगम से टैंकर भिजवाने के लिए कहते हैं तो वहां टैंकर कम होने से कभी यहां तो कभी वहां जाना बताकर टाल देते हैं। ऐसे में निगम में टैंकरों की संख्या अधिक हो तो सभी को आसानी से पानी मिल सके। दक्षिण का एक टैंकर भारत जोड़ो यात्रा में गायबहालत यह है कि नगर  निगम में वैसे ही पानी के टैंकरों की कमी है। वहीं हालत यह है कि कोटा दक्षिण का एक पानी का टैंकर राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान गायब हो गया।  निम की ओर से यात्रा के दौरान टैंकर भजा गया था लेकिन अगले दिन वहां टैंकर मिला ही नहीं। निगम सूत्रों के अनुसार काफी तलाशने के बाद भी अभी तक उसका कहीं पता नहीं चला है।  उस बात को करीब डेढ़ महीने से अधिक का समय हो गया है लेकिन निगम अधिकारियों ने अभी तक न तो उसकी रिपोर्ट थाने में दी है और न ही कोई अग्रिम कार्यवाई की है। निगम अधिकारी इसे हल्के में ही ले रहे हैं। 

इनका कहना है 
नगर निगम में पानी के टैंकरों की कमी है। उसे देखते हुए नए टैंकर खरीदने के टैंडर किए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बजट से 15 नए टैंकर  खरीदे जाने हैं। करीब पौने 6 लाख प्रति टैंकर की दर से टैंकर खरीदे जाएंगे। गाजियाबाद की फर्म से टैंकर सप्लाई होगी। गर्मी से पहले नए टैंकर निगम में आ जाएंगे। 
-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण 

कोटा उत्तर में पानी के टैंकरों की कमी है। इन टैंकरों के अलावा अन्य छोटे-छोटे संसाधन जो भी आवश्यक हैं उनकी भी शीघ्र ही खरीद की जाएगी। जिससे गर्मी से पहले टैंकरों की कमी को पूरा किया जा सके। 
-मंजू मेहरा, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर 

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