बिजली आपूर्ति सुनिश्चित रखने के लिए अतिरिक्त कोयला आवंटित की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचे भंवर सिंह भाटी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह से की मुलाकात

वर्तमान में राजस्थान को छत्तीसगढ़ से कोयला आपूर्ति में आ रही दिक्कतों का समाधान किया जाए।

 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित रखने के लिए अतिरिक्त कोयला आवंटित की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचे भंवर सिंह भाटी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह से की मुलाकात

राजस्थान की विशेष परिस्थितियों के मध्यनजर सौभाग्य योजना की समय सीमा बढ़ाई जाए

नई दिल्ली।  राजस्थान के ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  भंवर सिंह भाटी ने बुधवार को नई दिल्ली के श्रम शक्ति भवन में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह से मुलाकात कर राजस्थान में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हुए सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की तथा केंद्रीय सहयोग का आग्रह किया। भाटी ने केंद्रीय मंत्री  आर.के. सिंह से मांग करते हुए कहा कि वर्तमान में राजस्थान को छत्तीसगढ़ से कोयला आपूर्ति में आ रही दिक्कतों का समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कॉल इंडिया लिमिटेड द्वारा राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को अनुबंधित 11.33 रेक प्रतिदिन की एवज में मात्र 9.3 रेक प्रतिदिन की ही आपूर्ति की जा रही है जिसकी वजह से राज्य में बिजली संकट की स्थिति गंभीर होती जा रही है उन्होंने मांग रखी कि राज्य की बिजली की मांग को पूरा करने के लिए कॉल ब्लॉक से जुड़े 4340 मेगावाट की तापीय इकाइयों को मार्च 2022 से लगभग 1 वर्ष की अवधि के लिए प्रतिदिन 42500 मीट्रिक टन अतिरिक्त कोयला अस्थाई तौर पर आवंटित करवाया जाए। साथ ही राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के कोल इंडिया लिमिटेड से जुड़े तापीय विद्युतगृहों को कोयला आपूर्ति हेतु वर्तमान में आपूर्ति की जा रही 9.3 रेक प्रतिदिन के अतिरिक्त 6 रेक प्रतिदिन(कुल 15.3 रेक प्रतिदिन) की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई जाए।  भाटी ने आग्रह किया कि पीईकेबी कॉल ब्लॉक की 1136 हेक्टेयर द्वितीय चरण वन भूमि पर खनन हेतु वन भूमि पर कब्जा एवं अन्य स्वीकृति या छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को अतिशीघ्र दिलवाई जाए।


सौभाग्य योजना की समय सीमा बढ़ाने के संबंध में  भाटी ने केंद्रीय मंत्री से कहा कि राजस्थान की विकट भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सौभाग्य योजना की समय सीमा को 30 सितंबर 2023 तक बढ़ाया जाए ताकि राजस्थान के दूर-दराज के गांव ढाणीयों में शेष बचे हुए घरों के विद्युतीकरण को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि योजना की समय सीमा कम होने की वजह से प्रदेश में कुल 210843 आवासों के विद्युतीकरण के लक्ष्य की तुलना में मात्र 36121 आवासों का ही विद्युतीकरण हो पाया है।


 भाटी ने केंद्रीय मंत्री से केंद्र प्रवर्तित कुसुम योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार के अधीन बैंकों को किसानों के लिए सुलभ लोन देने में बैंकों की भूमिका सुनिश्चित करने हेतु को दिशानिर्देश जारी करने का भी आग्रह किया। राजस्थान में गोडावन के संरक्षण के साथ अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना में आ रही बाधाओं के निवारण के लिए प्रयास करें केंद्र सरकार। भाटी ने केंद्रीय मंत्री से राजस्थान में गोडावण के संरक्षण के साथ-साथ अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के सम्बन्ध में स्पष्टीकरण/संशोधन हेतु भारत सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका में ढिलाई से हो रहे नुकसान का मुद्दा भी उठाया|

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 भाटी ने प्रकरण पर विस्तार से चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा गोडावण पक्षी के संरक्षण हेतु राजस्थान एवं गुजरात सरकार को निर्देशित किया है कि गोडावण के विचरण क्षेत्र, प्रॉयोरिटी एवं पोटेंशियल एरिया में सभी लो वोल्टेज लाइनों को भविष्य में भूमिगत रखा जाएं एवं वर्तमान लो वोल्टेज लाइनों को भूमिगत किया जाये | सभी हाई वोल्टेज लाइनों पर तुरंत बर्ड डाइवर्टर लगाया जाये वर्तमान ओवरहेड लाइनों की फिजिबिलिटी स्टडी की जाये और यदि संभव हो तो लाइनों को भूमिगत किया जाये | जहाँ तकनीकी रूप से भूमिगत किये जाने में समस्या हों तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से परीक्षण करवाया जावे, भविष्य में बनाई जाने वाली सभी ओवरहेड लाईनों की तकनीकी रिपोर्ट का परीक्षण कमेटी से करवाया जाये |


 भाटी ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में अक्षय ऊर्जा देश की कुल संभावित क्षमता का 20 प्रतिशत है साथ ही यह क्षेत्र गोडावण का निवास स्थल भी है जो की एक लुप्तप्राय पक्षी प्रजाति है | अब गोडावण के विचरण क्षेत्र में प्रतिबंध एवं विधुत लाईनों को भूमिगत किये जाने से राज्य के वर्ष 2025 तक के घोषित अक्षय ऊर्जा लक्ष्य 37.5  गीगावाट एवं 2030 तक 450 गीगावाट के राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति पूरी तरह से प्रभावित होगी | इस निर्णय से लगभग 50-60 गीगावाट क्षमता की परियोजनाएं प्रभावित होंगी |


 भाटी ने बताया कि लाइनों के भूमिगत किये जाने में विभिन्न प्रकार के तकनीकी, व्यावहारिक, सामाजिक, आर्थिक, वित्तीय एवं क़ानूनी समस्याएं हैं और यह अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि को बुरी तरह प्रभावित करेंगे। अतः इस प्रकरण के स्पष्टीकरण / संशोधन / पुनर्विचार हेतु माननीय उच्चतम न्यायालय में पैरवी की जाये।केंद्रीय मंत्री ने  भाटी द्वारा सुझाए गए सभी बिंदुओं पर सकारात्मक सहयोग देने का आश्वासन दिया और जल्द ही राजस्थान में ऊर्जा आपूर्ति के संकट का समाधान करने में हर संभव सहयोग देने की बात कही। केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल और केंद्रीय ऊर्जा सचिव  आलोक कुमार शामिल थे।

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