विश्व मातृभाषा दिवस पर विशेष : राजस्थान में बोली जाती हैं 79 भाषाएं और 138 मातृभाषाएं

प्रदेश में सात करोड़ 70 लाख हिन्दीभाषी 

विश्व मातृभाषा दिवस पर विशेष : राजस्थान में बोली जाती हैं 79 भाषाएं और 138 मातृभाषाएं

आज प्रदेश में सात करोड़ 70 लाख हिन्दीभाषी और 2 करोड़ 68 लाख से ज्यादा लोग राजस्थानी भाषी हैं।

जयपुर। क्या आप जानते हैं कि राजस्थान में 79 भाषाएं और 138 मातृभाषाएं बोली जाती हैं। आज प्रदेश में सात करोड़ 70 लाख हिन्दीभाषी और 2 करोड़ 68 लाख से ज्यादा लोग राजस्थानी भाषी हैं। हिन्दी भाषियों में दो करोड़ 26 लाख लोग ही ऐसे हैं, जो इसे मातृभाषा मानते हैं, जबकि राजस्थान की विभिन्न बोलियों को मिला लें तो प्रदेश में राजस्थानीभाषी 3 करोड़ 82 लाख से अधिक हो जाते हैं। राजस्थानी को मातृभाषा के रूप में देश में बोलने वाले दो करोड़ 76 लाख हो गए हैं। 

प्रदेश में बोली जाने वाली मातृभाषाओं के रूप में जनगणना विभाग की सूची में मारवाड़ी, मेवाड़ी, वागड़ी, हाड़ौती, ढुंढ़ाड़ी, बागड़ी राजस्थानी, पंजाबी, उर्दू, ब्रज, मालवी, सिंधी और मेवाती हैं। विभाग ने 15 साल पहले जिस समय बोली जाने वाली भाषाओं का पता लगाया तो प्रदेश में हिन्दी और राजस्थानी के साथ पंजाबी, सिंधी, गुजराती, बंगाली, मळयाळम, मराठी, उड़िया, तमिल, नेपाली, तेलुगू और मैथिली भाषाएं भी बोली जाती हैं। भाषाओं की यह विविधता राजस्थान का वैभव है। 

जयपुरी भी एक भाषा थी
जनगणना विभाग की रिपोर्ट का अध्ययन करें तो पता चलता है कि पुरानी जनगणनाओं में जयपुरी भी एक भाषा रही है; लेकिन 2001 में इसके बोलने वाले दस हजार से कम हुए तो इसे सूचीबद्ध करना बंद कर दिया गया। प्रदेश में 1961 की जनगणना में जयपुरी भाषा के बारे में उल्लेख मिलता है।  

गैर-राजस्थानियों में सबसे अधिक पंजाबी, सबसे कम मैथिली
राज्य में सबसे कम मैथिली भाषी हैं, जबकि गैरराजस्थानियों-गैरहिन्दी भाषियों में सबसे अधिक पंजाबी हैं। इसके बाद उर्दू, सिंधी, गुजराती और बंगाली भाषियों का नंबर है। 

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अंगरेजी सिर्फ 5.08% की भाषा 
राजस्थान में रुतबे वाली भाषा समझी जाने वाली अंगरेजी को जन्म से ही बोलने वाले 19,800 से ही कम लोग हैं। इनकी तादाद 2001 की जनगणना में 13,202 थी। 

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भीली भाषा राजस्थान सहित पांच से अधिक प्रदेशों में 
भीली राजस्थान में 53, 88,000 से अधिक की मातृभाषा है। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा-नगर हवेली में यह सबसे अधिक बोली जाती है। 

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भाषाएं : राजस्थानी, मारवाड़ी, मेवाड़ी, बागड़ी, वागड़ी, धतकी, गोंडवाड़ी, देवड़ावाटी, खेराड़ी, शेखावाटी, ढुंढाड़ी, जयपुरी, भीली, बंजारा, सहरिया, लंबाड़ी, नीमाड़ी, मालवी, उज्जयिनी, रजवाड़ी, उमठवाड़ी, सोंधवाड़ी, अहिरानी, भोयारी, पवारी, नागरचोल, महाजनी, लोरकी, सांसी, सिंधी, थारेली आदि। 

जा ने राजनेता और ये सरकारें राजस्थानी की चिंता कब करेंगे? यह हमारी हजारों साल पुरानी अमूर्त संस्कृति का हिस्सा है। यह हमारी अस्मिता है। अब राजस्थानी को मान्यता देने में विलंब नहीं करना चाहिए; क्योंकि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा पर ही जोर है। 
-सीपी देवल, वरिष्ठ साहित्यकार 

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