असर खबर का - आखिर जागा वन विभाग, अब तोड़ेगा 2 किमी सीसी सड़क

नवज्योति ने उजगार किया था मिलीभगत का गठजोड़

असर खबर का - आखिर जागा वन विभाग, अब तोड़ेगा 2 किमी सीसी सड़क

जाखमूंड वनखंड से जब्त की मिक्सर मशीन, ट्रैक्टर-ट्रॉली व पानी का टैंकर

कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में दिनदहाड़े 2 किमी लंबी सीसी सड़क बनाए जाने का संगीन मामला दैनिक नवज्योति द्वारा उजागर करने के बाद शुक्रवार को वन विभाग में हड़कम्प मच गया। राज्य स्तरीय वन अधिकारियों ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। एपीसीसीएफ एफसीए से लेकर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक सहित तमाम उच्चाधिकारियों ने कोटा मुख्य वनसंरक्षक एवं फिल्ड निदेशक व बूंदी डीएफओ से तीन दिन में जांच कर मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, बूंदी वनमंडल उप वन संरक्षक के निर्देश पर डाबी रैंजर ने कार्रवाई करते हुए जाखमूंड वनखंड से एक कंक्रीट मिक्सर, ट्रैक्टर-ट्रॉली व पानी का टैंकर जब्त किया है। वहीं, कार्यकारी निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी के ईशारे पर काम कर रहे ठेकेदार के खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम 1980 के उल्लंघन का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, वनभूमि पर नियम विरुद्ध बनी सड़क को खुर्द-बूर्द किया जाएगा।  

बूंदी वन मंडल के डाबी रेंज की जाखमूंड वनखण्ड में पिछले 20-25 दिनों से सीसी सड़क निर्माण कार्य चल रहा था। यह निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी द्वारा एफसीए-1980 के तहत बिना भूमि डायवर्जन के बनवाई जा रही थी।  जिसका खुलासा दैनिक नवज्योति ने 19 अप्रेल को रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर में सरेआम बनी 2किमी सड़क, अधिकारियों को होश नहीं...शिर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित कर मिलीभगत का खेल उजागर किया था। 

मशीन, ट्रेक्टर ट्रॉली और पानी का टैंकर किया जब्त
डाबी रैंजर हेमराज नागर ने बताया कि मामला सामने आने के बाद हमने कार्रवाई करते हुए जाखमूंड वनखंड से एक कंक्रीट मशीन, एक ट्रैक्टर-ट्रॉली और एक पानी का टैंकर जब्त किया है। वहीं, निर्माण सामग्री भी सीज की है। ठेकेदार के खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम 1980 के उल्लंघन का मामला दर्ज किया है। ठेकेदार से पूछताछ की जा रही है कि वह किसके इशारे पर काम कर रहा था। मामले की जांच शुरू कर दी है।  

बिना एफसीए कार्रवाई के बनाई सड़क
रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र जाखमूंड वनखंड में बसे रामपुरिया गांव को कोटा-बूंदी हाइवे से जोड़ने को  पीडब्ल्यूडी ने वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धज्जियां उड़ाते हुए नियम विरुद्ध वनभूमि पर करीब दो से ढाई किमी लंबी सीसी सड़क बना दी।  जेसीबी मशीनों से खुदाई कर जंगल की पौने दो हैक्टर जमीन को तहस-नहस कर वन्यजीवों का आशियाना उजाड़ कर वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 का भी उल्लंघन किया। जबकि, इसी वनभूमि पर जुलाई 2023 में वसुंधरा राजे की सभा के लिए अस्थाई टैंट लगाने पर ही वन विभाग ने आयोजक से 2 लाख का जुर्माना वसूल लिया था। 

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यह होती है एफसीए-1980 की प्रोसेस
जानकारी के अनुसार, कोई भी सरकारी एजेंसी जब वन भूमि पर कोई गैर वानिकी कार्य करवाना चाहती तो उसे सबसे पहले वन विभाग भारत सरकार के परिवेश पोर्टल पर आवेदन करना होता है। पोर्टल पर किए गए सवालों के जवाब मय सबूत के साथ अपलोड करने होते हैं। इसके बाद केंद्रीय वन विभाग पोर्टल पर दी गई जानकारी का क्रॉस एग्जामिनेशन करती है। इसके बाद मामला राज्य सरकार के पास आता है और राज्य वन विभाग के एपीसीसीएफ-एफसीआई से होता हुआ प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ-हॉप), मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, एपीसीसीएफ वन सुरक्षा से होते हुए फाइल संबंधित जिले के मुख्य वनसंरक्षक एवं फिल्ड डायरेक्टर व उक्त जिले के डीएफओ तक जाती है। इसके बाद यदि वन भूमि 5 हैक्टेयर से अधिक होती है तो सीसीएफ को मौके पर जाकर निरीक्षण करना होता है और परिवेश पोर्टल पर दर्ज की गई जानकारी का क्रोस एग्जामिनेशन कर वापस पोर्टल पर रिपोर्ट भेजनी होती है। यदि, जमीन 5 हैक्टेयर से कम होने की स्थिति में संबंधित जिले के डीएफओ को यह कार्य करना होता है। इसके बाद जांच अधिकारी की सहमति के बाद एफसीए के तहत वन भूमि डायवर्जन की कार्रवाई हो सकती है।

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क्या कहते हैं वन अधिकारी
आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। मामले से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को अवगत किया है। फिलहाल, मैं अभी छुट्टी पर लखनऊ गमी में आई हूं।
- शिखा मेहरा, एपीसीसीएफ, एफसीए जयपुर 

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मामले की जांच कर सोमवार तक कोटा सीसीएफ से तथ्यात्मक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद एक्शन लिया जाएगा। 
- पीके उपाध्याय, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, जयपुर

मामला जानकारी में आया है। इसकी जांच के निर्देश दे दिए हैं। कोटा सीसीएफ व बूंदी वनमंडल डीएफओ को जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। वनभूमि पर सड़क कब से बन रही थी , कब और कैसे बनी सहित अनेक मुद्दों पर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। इसके आधार पर सख्त कार्रवाई करेंगे। 
- कैलाश चंद मीणा, एपीसीसीएफ, वनसुरक्षा जयपुर

वनभूमि पर कोई सड़क बनवाने के दिशा निर्देश नहीं दे सकता। बिना एफसीए कार्यवाही के इस तरह का काम नहीं कर सकते। बूंदी वनमंडल डीएफओ से पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दी जाएगी। 
- रामकरण खैरवा, मुख्य वन संरक्षक एवं फिल्ड डायरेक्टर कोटा संभाग

मामला दिखवाया है और कार्रवाई भी की है। नोडल एजेंसी पीडब्ल्यूडी है। हमने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही पीडब्ल्यूडी को पत्र लिख जवाब मांगा है कि उन्होंने वनभूमि पर किसकी स्वीकृति से सड़क बनाई। मामले की सभी पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। वनभूमि पर बनी सड़क खुद-बूर्द करेंगे। 
- वीरेंद्र सिंह कृष्णिया, उप वन संरक्षक बूंदी वन मंडल

मैंने अभी कुछ समय पहले ही ज्वाइन किया है। गत 17 अप्रेल को दो बार पीडब्ल्यूडी को नोटिस देकर जवाब मांगा था। लेकिन वे गुमराह करते रहे। शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए जाखमूंड वनखण्ड से एक ट्रैक्टर-ट्रॉली, मिक्सर मशीन व पानी का टैंकर जब्त कर ठेकेदार के खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम 1980 के उल्लंघन का मामला दर्ज किया है। पूछताछ में सामने आएगा कि ठेकेदार किसके इशारे पर सड़क बना रहा था। उसके बयान के बाद संबंधित एजेंसी के खिलाफ मामला दर्ज करेंगे। वहीं, वन भूमि पर बनी यह सड़क नियम विरुद्ध है, जिसे खुद-बूर्द कर तोड़ा जाएगा।
- हेमराज नागर, रैंजर, डाबी रैंज, वन मंडल बूंदी 

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