चंबल किनारे सूखे हलक, स्मार्ट सिटी टैंकर के हवाले

जलदाय विभाग शहरी व ग्रामीण इलाकों में टैंकरों से कर रहा जलापूर्ति

चंबल किनारे सूखे हलक, स्मार्ट सिटी टैंकर के हवाले

पानी पर्याप्त नहीं मिल रहा। टैंकर चालक किसी को ज्यादा तो किसी को कम पानी दे रहा है। जिससे लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाता।

कोटा। शिक्षा नगरी को चमर्णयवती का आशीर्वाद मिला है फिर भी हलक सूखे हैं। चंबल किनारे बसे होने के बावजूद शहरी व ग्रामीण इलाकों में पानी के लिए मारामारी मची हुई है। जबकि, बूंदी व भीलवाड़ा जिलों को चंबल से सप्लाई दी जा रही है। लेकिन, जलदाय विभाग के अफसरों की ढिलाई व लापरवाही से नदी किनारे सैकड़ों लोग पानी को तरस रहे हैं। हालात यह हैं, स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल शहर में पानी के लिए टैंकर चलाए जा रहे हैं, जिसके लिए विभाग प्रतिदिन 2 लाख रुपए से ज्यादा की राशि खर्च कर रहा है। यदि, आवंली-रोजड़ी, दौलतगंज, नयागांव, रतकांकरा, प्रेमनगर सहित अन्य इलाकों में सीधे पाइप लाइन के जरिए पानी मिले तो सैंकड़ों लोगों की नीर की पीर आसान हो जाएगी। वहीं लाखों रूपए बचेंगे।

75 टैंकर प्रतिदिन लगाते हैं 570 चक्कर
जलदाय विभाग की ओर से जिले में कुल 75 टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। यह टैंकर प्रतिदिन 570 फेरे करते हैं। प्रत्येक टैंकर 5 हजार लीटर पानी शहरी व ग्रामीण इलाकों में पहुंचाते हैं। ऐसे में 24 घंटे में दो दर्जन इलाकों में कुल 28 लाख 50 हजार लीटर पानी पहुंचाया जाता है। 

ग्रामीण इलाकों में दौड़ रहे 42 टैंकर
ग्रामीण क्षेत्रों में मंडाना, कैलाश नगरी, कलम का कुआं, मांडलिया, केबल नगर, मुकुंदपुरा सहित अन्य इलाकों में 42 टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। इन क्षेत्रों में एक दिन में 305 बार टैंकर पानी लेकर जाते हैं। हालांकि, इनमें बड़े कस्बे व गांव शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है, पानी पर्याप्त नहीं मिल रहा। टैंकर चालक किसी को ज्यादा तो किसी को कम पानी दे रहा है। जिससे लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाता।

प्रतिदिन खर्च हो रहे 2.22 लाख रुपए
जिले में टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति करवाने में जलदाय विभाग का प्रतिदिन 2 लाख से ज्यादा रुपए खर्च हो रहा है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एक दिन में 75 टैंकरों से 570 बार में कुल 28 लाख 50 हजार लीटर पानी सप्लाई किया जाता है। जिसके  लिए विभाग द्वारा प्रत्येक टैंकर को एक ट्रिप पर 390 रुपए का भुगतान किया जाता है। ऐसे में 570 ट्रिप पर कुल 2 लाख 22 हजार 300 रुपए प्रतिदिन खर्च कर शहर से गांव तक पानी उपलब्ध करवा रहे हैं। 

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टैंकर आते ही लगती है दौड़
बूंद-बूंद पानी के लिए लोगों को चिलचिलाती धूप में दौड़-भाग करनी पड़ रही है। सुबह ही खाली चरे, बाल्टियां लेकर लोग पानी के जुगाड़ के लिए निकल पड़ते हंै। पानी को लेकर लड़ाई-झगड़े तक की नौबत आने लगी है। जिले में 44 डिग्री तापमान  पहुंचने पर पेयजल आपूर्ति व जल समस्या की हकीकत जानने के लिए शहर से लेकर आसपास के गांवों में पहुंची तो तस्वीर हैरान करने जैसी सामने आई।

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क्या कहते हैं बाशिंदे
इस इलाके में जलदाय विभाग के टैंकर आते हैं लेकिन पानी का वितरण सही नहीं होने से जरूरतमंदों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। कई बार तो सुबह के बजाए शाम को टैंकर आता है तो कई बार पूरा दिन ही नहीं आता। टैंकर स्थाई समाधान नहीं है, इलाके में पाइप लाइन बिछाएं ताकि हमें नलों से पानी मिल सके। 
कैलाश, पप्पू लाल, यादराम गुर्जर, आवंली रोजड़ी 

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समय पर टैंकर नहीं आते, चालक किसी को कम तो किसी को ज्यादा पानी देते हैं। परिवार में 6 सदस्य हैं, 300 लीटर ही पानी मिल पाता है, जा जरूरत के हिसाब से कम हैं। कई बार तो टैंकर आता ही नहीं है, मजबूरी में पानी मोल खरीदना पड़ता है। जनप्रतिनिधि केवल वोट मांगने आते हैं, इसके बाद इलाके में झांकते तक नहीं हैं। 
-शंभु दयाल गुर्जर, महेंद्र नागर, नयागांव

आवंली रोजड़ी, रतकांकरा, दौलतगंज, नयागांव वाला इलाके में करीब 60 से 70 हजार की आबादी है। यहां पानी के लिए हर रोज संघर्ष करना पड़ता है। इलाके में जो टैंकर आ रहे हैं वो पर्याप्त नहीं है। लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा। मजबूरन उन्हें मोल खरीदना पड़ रहा है। यह समस्या टैंकरों से खत्म होने वाली नहीं है। आबादी के लिहाज से यहां पानी की टंकी का निर्माण करवाकर पाइप लाइन बिछानी चाहिए ताकि बाशिंदों को सुचारू रूप से पानी मिल सके।
-धनराज गुर्जर, पार्षद आंवली रोजड़ी

अमृत 2.0 पेयजल योजना के तहत डीपीआर तैयार हो रही है, जिसमें अभी जिन इलाकों में टैंकरों के माध्यम से पानी सप्लाई किया जा रहा है उन इलाकों को कवर कर लिया जाएगा। इसके बाद इन क्षेत्रों में पानी की समस्या नहीं रहेगी।
-शुभांशु दीक्षित, एडिशनल चीफ इंजीनियर, जलदाय विभाग कोटा

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