अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर कांग्रेस का निशाना: सरकार कर रही परंपरा का उल्लंघन, पीएम मोदी की गैर मौजूदगी को लेकर उठाए सवाल
परंपराओं का उल्लंघन: स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर कांग्रेस ने घेरा
कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ चर्चा में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने 1954 का उदाहरण देते हुए कहा कि तब नेहरू सदन में मौजूद थे। उन्होंने उपाध्यक्ष पद रिक्त रहने को संवैधानिक उल्लंघन बताते हुए सरकार पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाये अपने प्रस्ताव पर जारी चर्चा में पीएम की गैर मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए और कहा कि सरकार इसमें भी परंपराओं और नियमों का उल्लंघन कर रही है।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जय राम रमेश ने बुधवार को यहां एक बयान में कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर मंगलवार को हुई बहस के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने गर्व से दावा किया कि इस बहस के लिए 10 घंटे का समय दिया गया है, जबकि दिसंबर 1954 में इसी तरह के एक प्रस्ताव के लिए केवल ढाई घंटे निर्धारित किए गए थे।
उन्होंने कहा कि रिजिजू शायद यह बताना भूल गए कि 18 दिसंबर 1954 को स्वयं प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु बहस के दौरान सदन में मौजूद रहे और उसमें हिस्सा भी लिया था। सदन में बोलते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने सदन की अध्यक्षता कर रहे उपाध्यक्ष से अनुरोध किया था कि बहस के समय का अधिकांश हिस्सा विपक्ष को दिया जाए। लोकसभा में जब यह प्रस्ताव लाया गया था तो तब 489 सदस्यों वाली लोकसभा में कांग्रेस के 364 सांसद थे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इसके बाद जब भी अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आये और उन पर बहस हुई तब लोकसभा का संचालन उपाध्यक्ष कर रहे थे लेकिन 2019 के मध्य से लोकसभा में कोई उपाध्यक्ष नहीं है, जो संविधान का स्पष्ट उल्लंघन है।

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