सुभाष चंद्रा की निजी दिवालिया प्रक्रिया में नया ट्विस्ट, NCLT ने 25 अगस्त का फैसला रोका; 6.25 करोड़ की योजना पर फिर सुनवाई
संपत्ति हस्तांतरण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध
नई दिल्ली। जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा की निजी दिवालिया प्रक्रिया से जुड़े मामले में नया मोड़ आ गया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच सदस्यीय पीठ ने 25 अगस्त को दिए गए फैसले पर रोक लगा दी है। पीठ ने कहा कि मामले में स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया, इसलिए अब इसकी नए सिरे से सुनवाई होगी। साथ ही चंद्रा को अपनी किसी भी संपत्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित करने या उससे अलग करने पर रोक लगा दी गई है।
यह विवाद चंद्रा की 6.25 करोड़ रुपये के रीपेमेंट प्लान से जुड़ा है, जबकि लेनदारों के स्वीकार किए गए दावों की कुल राशि 22,006.57 करोड़ रुपये है। शुरुआती दो सदस्यीय पीठ के सदस्यों की राय अलग थी। तीसरे सदस्य ने बाद में रीपेमेंट प्लान को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन तीनों राय में सहमति नहीं बनी। इसके बाद मामला पांच सदस्यीय पीठ के पास भेजा गया है।

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