पिछले दो चुनावों में बदली तस्वीर, जयपुर में दो निगम बने तो भाजपा की पकड़ हुई कमजोर

2014 में 91 वार्डों में भाजपा का दबदबा

पिछले दो चुनावों में बदली तस्वीर, जयपुर में दो निगम बने तो भाजपा की पकड़ हुई कमजोर
जयपुर नगर निगम चुनावों में परिसीमन ने राजनीतिक समीकरण बदले। 2014 में 91 वार्डों में भाजपा ने 64 और कांग्रेस ने 18 सीटें जीतीं। 2020 में निगम दो हिस्सों में बंटा। ग्रेटर में भाजपा ने 88 और कांग्रेस ने 49, जबकि हेरिटेज में कांग्रेस ने 47 और भाजपा ने 42 सीटें जीतीं।

जयपुर। जयपुर नगर निगम के पिछले दो चुनाव शहर की बदलती राजनीतिक तस्वीर को समझने के लिए बेहद अहम हैं। वर्ष 2014 में जहां एक ही नगर निगम और 91 वार्ड थे, वहीं 2020 में परिसीमन के बाद जयपुर को हैरिटेज और ग्रेटर दो नगर निगमों में बांट दिया गया और कुल वार्डों की संख्या बढ़कर 250 हो गई। इस बदलाव ने केवल प्रशासनिक ढांचा नहीं बदला, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के चुनावी समीकरण भी काफी हद तक बदल दिए।

2014: भाजपा की एकतरफा बढ़त- 2014 के चुनाव में भाजपा ने जयपुर के 91 में से 64 वार्डों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस केवल 18 वार्डों तक सीमित रही और नौ सीटों पर निर्दलीय जीते। भाजपा की यह जीत इतनी बड़ी थी कि पार्टी ने लगातार पांचवीं बार नगर निगम बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल कर ली। दिलचस्प बात यह रही कि उस समय राज्य में भाजपा की सरकार थी और वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं। चुनाव परिणामों ने जयपुर को भाजपा के मजबूत शहरी गढ़ के रूप में स्थापित किया। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि लगातार कई चुनावों से वह निगम में भाजपा के मुकाबले पिछड़ रही थी। चुनाव के बाद निर्मल नाहटा निर्विरोध महापौर चुने गए।

2020: वार्ड बढ़े, निगम बंटा और मुकाबला बदला- 2020 में परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। जयपुर नगर निगम को दो हिस्सों जयपुर हेरिटेज और जयपुर ग्रेटर में बांट दिया गया। हेरिटेज में 100 और ग्रेटर में 150 वार्ड रखे गए। यानी पांच साल में चुनावी मैदान 91 से बढ़कर 250 वार्ड का हो गया। ग्रेटर में भाजपा ने फिर अपना दम दिखाया और 150 में 88 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 49 सीटें मिलीं, जबकि अन्य के खाते में 13 सीटें गईं। दूसरी ओर हेरिटेज में तस्वीर उलट गई। यहां कांग्रेस 47 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि भाजपा को 42 सीटें मिलीं और 11 सीटें अन्य के खाते में गईं। यानी 2020 का चुनाव यह संदेश लेकर आया कि जयपुर की राजनीति अब पूरी तरह एक तरफा नहीं रही। ग्रेटर भाजपा का मजबूत गढ़ बना रहा, जबकि पुराने शहर यानी हेरिटेज में कांग्रेस ने वापसी की।

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2020 में पुराने जयपुर में कांग्रेस मजबूत होकर उभरी और बाहरी व विस्तार वाले इलाकों में भाजपा का प्रभाव कायम रहा। 2020 में महापौर चुनाव भी रोचक रहा। हेरिटेज में कांग्रेस की मुनेश गुर्जर ने 56 वोट हासिल कर भाजपा की कुसुम यादव को हराया, जबकि ग्रेटर में भाजपा की सौम्या गुर्जर महापौर बनीं।

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इन दोनों चुनावों से एक बात साफ  है जयपुर निगम चुनाव में परिसीमन, वार्डों की संख्या, आरक्षण और पुराने शहर बनाम बाहरी इलाकों का विभाजन परिणामों पर बड़ा असर डालता है। साल 2026 में फिर 150 वार्डों का नया ढांचा सामने है और महापौर पद अनारक्षित होने से पुराने राजनीतिक दिग्गजों की सक्रियता बढ़ी है। ऐसे में 2014 और 2020 के परिणाम इस बार के चुनावी मुकाबले की पृष्ठभूमि समझने का अहम आधार बन गए हैं।

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