उप राष्ट्रपति राधाकृष्णन के दौरे के दौरान सड़क पर घंटों फंसा रहा मरीज, विपक्ष ने की केंद्र सरकार की आलोचना 

वीआईपी प्रोटोकॉल की भेंट चढ़ी इंसानियत: त्रिपुरा में एम्बुलेंस और मरीज घंटों फंसे

उप राष्ट्रपति राधाकृष्णन के दौरे के दौरान सड़क पर घंटों फंसा रहा मरीज, विपक्ष ने की केंद्र सरकार की आलोचना 

उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन के त्रिपुरा दौरे के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण 58 किमी लंबा राजमार्ग बंद रहा। इस बीच एक स्ट्रोक का मरीज और एम्बुलेंस दो घंटे तक फंसे रहे, जिससे प्रशासन की भारी आलोचना हो रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता न देने पर नाराजगी जताई है। विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भी अव्यवस्था रही।

अगरतला। उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन के रविवार को त्रिपुरेश्वरी मंदिर दौरे के दौरान सड़क पर लगाये गये अवरोधकों की वजह से एक मरीज के दो घंटे से ज्यादा समय तक फंसे रहने की खबरों के बाद त्रिपुरा प्रशासन की कड़ी आलोचना हुई है। उप राष्ट्रपति के मंदिर दौरे के लिए सड़क को यातायात से मुक्त रखने के लिए सुबह से ही अगरतला-उदयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के 58 किलोमीटर लंबे हिस्से पर पुलिस तैनात कर दी गयी थी। इस दौरान, पैदल चलने वालों, एम्बुलेंस और दूसरी आपातकालीन सेवाओं के वाहनों समेत सभी गाड़यिों को रोक दिया गया, जिससे आने-जाने वाले और स्थानीय लोग परेशान हुए।

उप राष्ट्रपति के तय दौरे से काफी पहले ही उदयपुर और अगरतला के बीच सड़क के बड़े हिस्से बंद कर दिये गये थे और स्ट्रोक के मरीज की गाड़ी के साथ कई दूसरी गाड़ियों को बिशालगढ़ में घंटों तक रोक दिया गया था। इस दौरान मरीज पूरे समय कार के अंदर ही रहा। इसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो जाने से लोगों में गुस्सा फैल गया। तस्वीरों और वीडियो में मरीज लंबे इंतजार के दौरान फंसा हुआ दिख रहा था। 

जानकारी के अनुसार अगरतला शहर में भी ऐसी ही दिक्कतों की खबर मिली, जहां उत्तरी द्वार और हवाई अड्डा सड़क जैसे रास्तों पर यातायात उप राष्ट्रपति के त्रिपुरा यूनिवर्सिटी में तय कार्यक्रम से लगभग एक घंटा पहले रोक दिया गया। इससे पैदल चलने वालों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, कुछ लोगों ने पुलिस वालों से रास्ता देने की गुजारिश की, जबकि जिन इलाकों में यातायात पुलिस नहीं थी, वहां फंसे हुए यात्रियों और त्रिपुरा स्टेट राइफल्स और नागरिक पुलिस के सदस्यों के बीच टकराव हुआ। 

मानवाधिकार कार्यकर्ता ने बताया कि पूरे भारत में वीआईपी मूवमेंट प्रोटोकॉल के तहत, एम्बुलेंस और मरीजों को ले जाने वाली आपातकालीन गाड़यिों को सुरक्षा इंतजामों की परवाह किये बिना पहले प्रवेश दिया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि दो हफ़्ते पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान भी एम्बुलेंस और मुर्दाघर की गाड़यिों के फंसे होने की ऐसी ही घटनाएं सामने आयी थीं, जबकि यातायात प्रबंधन में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया था कि शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के निर्देश पर निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया था।

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एक और मामले में पुलिस ने त्रिपुरा विश्वविद्यालय में 14वें दीक्षांत समारोह में प्रवेश के लिए लोगों को पास जारी किये, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिये गये, जिससे बड़ी संख्या में फैकल्टी सदस्य, स्टाफ और छात्रों में गुस्सा फैल गया।

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