पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से करेंगे विशेष बातचीत, 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' पहल के उद्देश्य को लेकर होगी चर्चा
बंगाल में चुनावी शंखनाद: पीएम मोदी का कार्यकर्ताओं को जोश
भाजपा की 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' पहल के जरिए पीएम मोदी पश्चिम बंगाल के जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नमो ऐप के माध्यम से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना और बूथ स्तर पर संगठनात्मक ढांचा मजबूत करना है। पार्टी ने घर-घर जनसंपर्क और समावेशी समितियों के साथ चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य इकाई की 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' पहल का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जमीनी स्तर के कार्यकताओं से मिलाना है ताकि बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं में जोश भरा जा सके। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानमंत्री और राज्यभर के बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच सीधा संवाद करवाकर पार्टी के जमीनी संगठन को मजबूत करना है। पीएम मोदी से होने वाली इस बातचीत से यह उम्मीद है कि वे पश्चिम बंगाल में भाजपा के बूथ ढांचे की मजबूती का आकलन करेंगे, साथ ही जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं से उनकी राय, अनुभव और अन्य बातों पर विचार करेंगे। पार्टी नेताओं ने बताया कि इस पहल को जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने और बूथ,मंडल और जिला स्तर पर संगठनात्मक ताकत को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। बूथ-स्तर के नेताओं को सीधे प्रधानमंत्री के सामने अपने विचार और सुझाव रखने का मौका देकर भाजपा का लक्ष्य चुनाव वाले बंगाल में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना और अपनी चुनावी तैयारियों को और तेज करना है।
इस कार्यक्रम की शुरुआत नमोएप के जरिए लोगों से इसमें हिस्सा लेने की अपील के साथ की गई है, जहां चुने हुए कार्यकर्ताओं को पीएम मोदी के साथ सीधे बातचीत करने का मौका मिलेगा। पार्टी ने अपने जनसंपर्क संदेश में कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अपने विचार, उम्मीदें और सुझाव सीधे प्रधानमंत्री के साथ साझा करके 'पश्चिम बंगाल की आवाज' बनें और इस तरह राज्य के भविष्य को संवारने में अपना योगदान दें।
राज्य में भाजपा की ओर से किया गया यह पहला ऐसा प्रयास नहीं है। इसी नारे के तहत पार्टी अपने जमीनी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए अपने 'बूथ सशक्तिकरण अभियान' के कई चरण पहले ही पूरे कर चुकी है। सभी जिलों में एक विस्तृत रूपरेखा भेजी गई थी, जिसमें 11 सदस्यों वाली बूथ समितियां बनाने का निर्देश दिया गया था, बाद में इन समितियों में सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 20 कर दी गई। हर सदस्य को मतदाता सूची के कुछ खास पन्नों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, ताकि मतदाताओं और उनके परिवारों के साथ नियमित संपर्क बना रहे। पार्टी ने बूथ समितियों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को भी प्रतिनिधित्व देना सुनिश्चित किया है और कुछ सदस्यों को विशेष रूप से महिला मतदाताओं से संपर्क करने का काम सौंपा है।

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