अब ढाई घंटे में सफर पूरा : पीएम मोदी मंगलवार को करेंगे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण, घर से निकलने से पहले जरूर पढ़ लें नया ट्रैफिक प्लान
एशिया का सबसे लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को ₹11,963 करोड़ की लागत वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण करेंगे। इसकी सबसे बड़ी खूबी एशिया का सबसे लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर है, जो वन्य जीवों को शोर से बचाने के लिए 'साउंड प्रूफ' है। यह मार्ग दिल्ली से देहरादून की दूरी महज ढाई घंटे में समेट देगा।
देहरादून| दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को यहां लोकार्पण करेंगे। इस एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से देहरादून से दिल्ली की दूरी करीब ढाई घंटे में तय की जा सकेगी। जबकि अभी पांच से छह घंटे लगते हैं। करीब 210 किलोमीटर लम्बे इस एक्सप्रेस-वे की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इस पर शिवालिक की पहाड़ियों में करीब 12 किलोमीटर लम्बा एलिवेटिड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनाया गया है जो एशिया में सबसे लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर माना जा रहा है। इस कॉरिडोर को इस तरह बनाया गया कि सड़क पर तेज गति से वाहन दौड़ते रहेंगे और उसके नीचे वन्य जीवों की आवाजाही भी अनवरत जारी रहेगी और तो और वन्य जीवों को वाहनों की आवाज भी सुनाई नहीं देगी। इसके लिए बाकायदा साउंड प्रूफ शीट लगायी गयीं हैं।
करीब 210 किलोमीटर लम्बे इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य दिसंबर 2021 में शुरु हुआ था और इस पर लगभग 11,963 करोड़ रुपए की लागत आयी है। दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर से होते हुए देहरादून के आशारोड़ी को जोड़ता है। इस एक्सप्रेस वे पर पांच रेलवे ओवरब्रिज, 110 वाहन अंडरपास, 76 किमी सर्विस रोड, कुल 29 किमी का एलिवेटेड रोड, 16 प्रवेश और निकास द्वार बनाये गये हैं। इतना ही नहीं, इस शानदार एक्सप्रेस वे पर प्रत्येक तीस किलोमीटर की दूरी पर रेस्ट एरिया भी बनाए गयें हैं। जहां जन सुविधा केंद्र निर्मित किये गये हैं।
दिल्ली से देहरादून तक सड़कों पर अनेक शहरों में होने वाले जाम का झाम भी अब नहीं रहेगा। यही वजह है कि दिल्ली से देहरादून तक महज ढ़ाई घंटे में यात्रा पूरी हो जायगी। इस एक्सप्रेस-वे का डिजाइन सिर्फ तेज यात्रा के लिए नहीं, बल्कि ट्रैफिक के भी पुनर्वितरण (री-रूटिंग) के लिए किया गया है। दिल्ली में इसकी शुरुआत अक्षरधाम से होती है और यह बागपत, शामली, सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाता है। पूरे एक्सप्रेस-वे को इस तरह जोड़ा गया है कि बाहरी राज्यों से आने वाली गाड़ियां शहरों में प्रवेश किये बिना आगे बढ़ सकें।
वर्तमान में दिल्ली से देहरादून जाने के लिए मेरठ, मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और राष्ट्रीय राजमार्ग -58 से सफर किया जाता है। सामान्य ट्रैफिक में इस सफर में साढ़े पांच से छह घंटे लग जाते हैं। नया एक्सप्रेस-वे शुरू होने के बाद देहरादून जाने वाला बड़ा ट्रैफिक दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से शिफ्ट होकर सीधे नए एक्सप्रेस-वे पर जाएगा। इससे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर व्यस्त समय का जाम कम होगा और दिल्ली-गाजियाबाद सेक्शन पर यातायात का प्रवाह बेहतर होगा।
इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पंजाब और हरियाणा से देहरादून आने वाले वाहन अब ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे (ईपीई) पर आयेंगे और वहां से सीधे इस एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाएंगे। अभी बड़ी संख्या में वाहन सिर्फ दिल्ली से होकर गुजरते हैं जबकि उनका गंतव्य दिल्ली नहीं होता। इस पूरी परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने हाई-स्पीड ट्रैफिक रीडिस्ट्रिब्यूशन मॉडल के तौर पर विकसित किया है। डीपीआर के अनुसार, एक्सप्रेस-वे पर शुरुआती दौर में 20–30 हजार पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) आने का अनुमान है। इससे बाहरी राज्यों का ट्रैफिक दिल्ली शहर से बाहर ही डायवर्ट हो जाएगा और दिल्ली के अंदर लोकल ट्रैफिक पर दबाव कम होगा। जिससे प्रदूषण और ईंधन खपत में भी गिरावट आयेगी।
जब यह एक्सप्रेसवे तैयार करने की योजना बनाई गई थी, उस समय एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की बजाय पुराने सड़क मार्ग को ही चौड़ा करने का प्रस्ताव था। इसमें करीब 90 हजार पेड़ों को काटना पड़ रहा था। एनजीटी की आपत्ति के बाद एलिवेटेड रोड पर विचार किया गया, जिसे मूर्त रूप देने के लिए केवल 11 हजार पेड़ ही काटने पड़े। एलिवेटेड कॉरिडोर 575 पिलरों पर बनाया गया है। यह सहारनपुर के शिवालिक जंगल और देहरादून के राष्ट्रीय राजाजी टाइगर रिजर्व के ऊपर से गुजर रहा है। इस कॉरिडोर पर विशेष पीला प्रकाश देने वाली लाइटें लगाई गयीं हैं ताकि इन पर कीट पतंगे न आयें।

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