खड़गे का केंद्र पर हमला: पेट्रोल-डीजल के दाम चार दिन में दूसरी बार बढ़ाने पर मांगा जवाब, बोले-नाकामियों का बोझ जनता के सिर पर डाल रही सरकार

तेल की कीमतों पर सियासत

खड़गे का केंद्र पर हमला: पेट्रोल-डीजल के दाम चार दिन में दूसरी बार बढ़ाने पर मांगा जवाब, बोले-नाकामियों का बोझ जनता के सिर पर डाल रही सरकार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चार दिनों में दूसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पर सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों का बोझ जनता पर डाल रही है। खड़गे ने इसे "आम जनता की लूट" बताते हुए केंद्र सरकार से देश के आर्थिक संकट पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चार दिन के भीतर दूसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाये जाने के सरकार के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा है कि केंद्र सरकार को इस बारे में जनता को जवाब देना चाहिए। खड़गे ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि सरकार ने 15 मई के बाद आज सुबह अचानक फिर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिये। उन्होंने कहा कि अब स्पष्ट हो गया है कि देश संकट में है और केंद्र को इसका जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने तेल के दाम चार दिन में दूसरी बार में बढ़ाने के निर्णय को सरकार की गलत नीतियों का परिणाम बताया और कहा कि सरकार नाकामियों का बोझ जनता के सिर पर डाल रही है। उन्होंने कहा, “दाम बढ़े चार ही दिन हुए कि केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ा दिये। पूरी भूमिका बनाकर, बचत का उपदेश देकर अपनी नाकामियों का बोझ जनता पर डालने का कार्य प्रगति पर है।” कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि ‘आम जनता की लूट और उद्योग पति गौतम अडानी को अमेरिका से छूट’, यही केद्र का ‘कम्प्रोमाइज्ड मॉडल’ है।' केंद्र सराकर ने अमेरिका से हाथ-पैर जोड़कर रूसी तेल खरीदने की अनुमति की अवधि एक महीने के लिए बढ़वाई है और इससे देश के स्वाभिमान को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के अनुसार रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिल गयी है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों का बोझ आम जनता पर क्यों डाला जा रहा है।

खड़गे ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी में दूरदर्शिता और नेतृत्व की कमी है। उन्होंने कहा कि संकट के समय सरकार चुनावों में व्यस्त रही और बाद में 'चिकनी-चुपड़ी बातें कर लूट का प्लान' बनाया गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “केवल विदेशों में प्रायोजित जनसंपर्क गतिविधियां करने से कोई ‘विश्वगुरु’ नहीं बन जाता, जनता के प्रति जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी पड़ती है।” उन्होंने केंद्र सरकार से देश के समक्ष खड़े बड़े सवालों का जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि संकट से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही है, यह देश को बताया जाना चाहिए।

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