परेशानी : पानी ने बुझाई सौर ऊर्जा की लौ, पानी 200 से 300 मीटर तक नीचे
योजना में 100 मीटर की सीमा बन रही बाधा
भूजल स्तर में गिरावट से सोलर पंप सब्सिडी पर संकट।
कोटा। कोटा जिले सहित हाड़ौती अंचल के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि कई इलाकों में पानी 200 से 300 मीटर तक नीचे पहुंच गया है। पानी पाताल में समाने जैसी स्थिति ने अब खेती और सिंचाई के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसका सबसे बड़ा असर सरकार की सोलर पंप योजना पर देखने को मिल रहा है, जिसके तहत किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी अब सीमित दायरे में सिमटती जा रही है। दरअसल वर्तमान नियमों के मुताबिक 100 मीटर तक की गहराई वाले नलकूपों पर ही सोलर पंप लगाने के लिए सब्सिडी का प्रावधान है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ के कई गांवों में जलस्तर इस सीमा से काफी नीचे जा चुका है। ऐसे में हजारों किसान योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
अब महंगी सिंचाई बनी मजबूरी
जलस्तर गिरने के कारण किसानों को अब गहरे बोर करवाने पड़ रहे हैं, जिसकी लागत 2 से 5 लाख रुपए तक पहुंच रही है। इसके बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। सोलर पंप की सब्सिडी नहीं मिलने से किसान या तो बिजली कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं या डीजल पंप के सहारे सिंचाई कर रहे हैं, जिससे लागत कई गुना बढ़ गई है। कई किसानों का कहना है कि सोलर पंप योजना उनके लिए उम्मीद की किरण थी, लेकिन 100 मीटर की सीमा ने इस उम्मीद को अधूरा छोड़ दिया। जिन क्षेत्रों में पानी 150 मीटर से नीचे है, वहां यह योजना लगभग अप्रभावी हो चुकी है।
अतिदोहन श्रेणी में पहुंचे कई ब्लॉक
जानकारी के अनुसार कोटा संभाग के कई ब्लॉक अतिदोहनह्व (ओवर-एक्सप्लॉइटेड) श्रेणी में आ चुके हैं। इन क्षेत्रों में जितना पानी रिचार्ज होता है, उससे कहीं अधिक दोहन किया जा रहा है। परिणामस्वरूप हर साल जलस्तर औसतन 1 से 3 मीटर तक नीचे खिसक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम वर्षा, पारंपरिक जल स्रोतों की उपेक्षा और बढ़ती सिंचाई जरूरतों के कारण यह संकट और गहराता जा रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट भी गहरा सकता है।
भौतिक सत्यापन में आवेदन हो रहे रिजेक्ट
सरकार की सोलर पंप योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को सस्ती, स्वच्छ और निर्बाध ऊर्जा उपलब्ध कराना था, ताकि वे बिजली कटौती और महंगे डीजल से मुक्त हो सकें। लेकिन जलस्तर गिरने के कारण योजना का लाभ सीमित होता जा रहा है। भूजल स्तर 100 मीटर जाने के कारण अधिकांश किसान आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। और कुछ किसान आवेदन कर भी रहे हैं तो भौतिक सत्यापन में उनके आवेदन रिजेक्ट हो रहे हैं। किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मांग उठाई है कि सोलर पंप सब्सिडी के लिए निर्धारित 100 मीटर की सीमा को बढ़ाया जाए और इसे क्षेत्रवार जलस्तर के अनुसार तय किया जाए।
सरकार सोलर पंप दे रही है, लेकिन जब पानी ही नहीं है तो इसका फायदा कैसे मिलेगा? जलस्तर के अनुसार नियमों में बदलाव जरूरी है, ताकि अधिक किसान इससे लाभान्वित हो सके।
- महेंद्र सिंह, किसान
वर्तमान नियमों के मुताबिक 100 मीटर तक की गहराई वाले नलकूपों पर ही सोलर पंप लगाने के लिए सब्सिडी का प्रावधान है। इस योजना के नियमों में बदलाव केन्द्र सरकार के स्तर पर ही हो सकता है।
-आर.के. शर्मा, कृषि विशेषज्ञ

Comment List