खड़गे ने ठाकुर की टिप्पणी पर जताया रोष : अनुराण से की माफी की मांग, कहा- आरोपों को साबित नहीं कर सकते तो इस्तीफा दें 

उनकी छवि को जो नुकसान होना था

खड़गे ने ठाकुर की टिप्पणी पर जताया रोष : अनुराण से की माफी की मांग, कहा- आरोपों को साबित नहीं कर सकते तो इस्तीफा दें 

उनकी छवि को जो नुकसान होना था, हो गया। इसको लोकसभा की कार्यवाही से हटाया गया है, लेकिन सोशल मीडिया और अन्य मीडिया में यह चल रहा है।

नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य अनुराग ठाकुर द्वारा बुधवार को लोकसभा में वक्फ भूमि कब्जे को लेकर लगाये गये आरोप पर सदन में भारी रोष व्यक्त करते हुये कहा कि ठाकुर इसके लिए माफी मांगे नहीं, तो अपने आरोप को सही साबित करें। खड़गे ने सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर ठाकुर की टिप्पणी पर अपना रोष जताते हुये कहा कि लोकसभा में कांग्रेस सदस्यों द्वारा विरोध किये जाने पर इस टिप्पणी को वापस ले लिया गया था, लेकिन इससे उनकी छवि को जो नुकसान होना था, हो गया। इसको लोकसभा की कार्यवाही से हटाया गया है, लेकिन सोशल मीडिया और अन्य मीडिया में यह चल रहा है।

उन्होंने राजनीति में अपने लंबे करियर का हवाला दिया और निराशा व्यक्त की। उन्होंने माफी की मांग की और कहा कि अगर ठाकुर अपने आरोपों को साबित नहीं कर सकते, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए और अगर वे आरोप साबित कर देते हैं, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। उन्होंने कहा कि यह साबित किया जाना चाहिए कि वह या उनके परिवार के सदस्यों ने किसी वक्फ जमीन पर कब्जा किया है। उन्होंने कहा कि वह डरते नहीं हैं और वह झुकेंगे नहीं। खड़गे ने विधानसभा में पहले की उन घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री इस तरह के मामले में उनसे माफी मांग चुकें है। उन्होंने यह भी कहा कि सदन के नेता श्री ठाकुर की ओर से माफी मांगें। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों से वह झुकने वाले नहीं है। वह झुकेंगे नहीं बल्कि टूट सकते हैं। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेज रिजिजू कुछ कहने लगे तभी तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन बोलने लगे जिस पर श्री रिजिजू बैठ गये।

इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि टिप्पणियों को हटाना कोई उपाय नहीं हो सकता। सदन में माफी मांगने से सदस्य की गरिमा बनी रहेगी। उन्होंने हाल ही में समाजवादी पार्टी के सदस्य रामजी लाल सुमन द्वारा राणा सांगा को लेकर की गयी टिप्पणी का उल्लेख करते हुये कहा कि यदि संसदीय संस्था के सम्मान में कुछ हटाया जाता है, तो किसी भी सदस्य को इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा '' मेरे लिए, प्रत्येक सदस्य की अपनी एक अमूल्य प्रतिष्ठा होती है, जिसे बनाए रखना होता है, और इसलिए जो कुछ भी हटाया गया है, उसे कभी भी चर्चा में नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस इलेक्ट्रॉनिक युग में, कही गई कोई भी बात माइक्रोसेकंड में चर्चा में आ जाती है। अध्यक्ष द्वारा हटाया जाना शायद ही कोई उपाय हो। यह सदन सूचनाओं के मुक्त प्रवाह का स्थान नहीं है। दशकों से अर्जित प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं। सदस्यों को परामर्श दिए जाने की आवश्यकता है। राजनीतिक दलों को अपने सदस्यों को शिक्षित करना चाहिए।

इस पर कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि श्री खरगे के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। इस पर सभापति ने कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुये कहा कि रमेश उन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खरगे एक वरिष्ठ राजनेता हैं और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। वह अपनी बात रखने में पूरी तरह से सक्षम हैं। सभापति ने कहा कि यदि हम इस मुद्दे की गंभीरता से जांच करें, तो यह कुछ स्थितियों पर निर्भर करता है। यह दो बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे उठाता है, एक मुद्दा यह है कि एक संसद सदस्य सदन का सदस्य होने के महान विशेषाधिकार का उपयोग करता है, जो संवैधानिक संरक्षण है क्योंकि सदन में किसी सदस्य द्वारा कही गई किसी भी बात पर कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की जा सकती है और कोई आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती है। जब कोई सदस्य सदन में बोलता है तो उसे छूट दी जाती है और मैंने कई मौकों पर कहा है कि यह सूचनाओं के मुक्त प्रसार का स्थान नहीं है। हम दशकों और आधी सदी से अधिक समय में अर्जित प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचा सकते।

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इसी सप्ताह, मैंने खरगे जी की तरह अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की थी, जब इस सदन के सदस्यों में से एक ने एक टिप्पणी की थी, लेकिन उस पर ध्यान दिया गया, हालांकि सदस्य ने जो हटाया गया था, उस पर ध्यान नहीं दिया। मैंने इस सदन में कहा था कि, इस इलेक्ट्रॉनिक युग में, विस्फोटक सोशल मीडिया में, कही गई कोई भी बात माइक्रोसेकंड में ध्यान आकर्षित कर लेती है। इसलिए अध्यक्ष द्वारा हटाया जाना शायद ही उपाय हो। हमने खरगे जी की प्रतिष्ठा जैसी स्थितियों का सामना किया और फिर राणा सांगा एक मुद्दा बन गए। लेकिन इस बयान को देने वाले सदस्य ने अपना रुख अपनाया कि वे जीवन भर इसे दोहराते रहेंगे।

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धनखड़ ने कहा कि मैंने तब एक बात कही थी - अगर इस संसदीय संस्था के सम्मान के रूप में कुछ हटाया जाता है, तो किसी भी सदस्य को इसका मुद्दा नहीं बनाना चाहिए, लेकिन संबंधित सदस्य इस पर कायम रहे। वे बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं। इस सदन में, दूसरे सदन में, बहुत वरिष्ठ लोगों के संबंध में सभी प्रकार की बातें की गई हैं। खरगे जी बहुत वरिष्ठ लोगों में से एक हैं। मैं वह नहीं कहना चाहता जो प्रधानमंत्री सहित संवैधानिक पदों पर बैठे अन्य बहुत वरिष्ठ लोगों के संबंध में कहा गया है। इसलिए मैं सभी से आग्रह करूंगा कि चाहे वे प्रधानमंत्री हों, सदन के नेता हों, विपक्ष के नेता हों, मेरे लिए हर सदस्य की एक अनमोल प्रतिष्ठा होती है जिसे बनाए रखना होता है, और इसलिए जो कुछ भी हटाया गया है उसे कभी भी आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि इसलिए घनश्याम तिवाड़ी की अध्यक्षता वाली संसदीय आचार समिति को यह कार्य सौंपा गया है कि वह इसका सही तरीका निकाले। क्योंकि उम्मीद है कि कोई सदस्य जो नए सदस्य होने या अन्यथा होने के कारण भावनात्मक रूप से बहक सकता है, और वह सदन में माफी मांगता है, इससे संबंधित सदस्य की छवि ही सुधरती है। लेकिन मीडिया के आकर्षण को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्री तिवाड़ी बहुत अनुभवी सदस्य हैं, जो आचार समिति का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें एक तंत्र खोजने का काम सौंपा गया है और इसके लिए, सदस्यों को परामर्श देने की आवश्यकता है। राजनीतिक दलों को कार्यशालाएँ आयोजित करनी चाहिए। उन्हें अपने सदस्यों को शिक्षित करना चाहिए।

 

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