असर खबर का - अब पानी में ही मगरमच्छ को दबोचेगा वन्यजीव विभाग
प्रदेश का पहला फ्लोटिंग क्रोकोडाइल केज कोटा में
नवज्योति की खबरों के बाद जागा वन विभाग।
कोटा। अब तक आपने सूना होगा कि पानी में मगरमच्छ से बैर नहीं ले सकते, लेकिन अब यह संभव है। जी हां, कोटा वन्यजीव विभाग न केवल पानी में मगरमच्छ से बैर ले रहा बल्कि उसे पानी में ही दबोचने की कवायद में जुट गया है। इसके लिए वन्यजीव विभाग ने ऑस्ट्रेलियाई तकनीक से प्रदेश का पहला फ्लोटिंग क्रोकोडाइल केज तैयार किया है। राजस्थान में कोटा पहला ऐसा जिला है, जिसके पास पानी में तैरता पिंजरा है। जिसकी मदद से वन्यजीव विभाग नदी, तालाबों व नहरों में से भी हिंसक मगरमच्छों को पकड़ सकेगा। दरअसल, सीवी गार्डन के तालाब में पिछले साल से दो मगरगच्छों ने ढेरा जमा रखा है। जिसकी वजह से मॉर्निंग वॉकर्स दहशत में है। दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित की थी, इसके बाद वन्यजीव विभाग ने मगरमच्छ को पकड़ने के लिए पानी में तैरता पिंजरा तैयार करवाया।
ऑस्ट्रेलिया में नदियों से होता है मगरमच्छ का रेस्क्यू
वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि वर्ष 2024 में सहायक वनपाल प्रेम कंवर शक्तावत मगरमच्छ रेस्क्यू प्रशिक्षण के लिए ऑस्ट्रेलिया गई थी। वहां हिंसक हो चुके मगरमच्छों को नदी-तालाबों से रेस्क्यू किया जाता है। इसके लिए ऑस्ट्रेलिया में पानी में तैरते पिंजरों का उपयोग किया जाता है। ऐसे में प्रेम कंवर ने वहां पिंजरों को बनाने की टेक्निक समझी और उनके सुझाव पर हमने कोटा में फ्लोटिंग क्रोकाइल केज तैयार करवाया। जिसके निर्माण में करीब 1.15 लाख रुपए की लागत आई।
एल्यूमिनियम के गोल पाइपों पर टिका पिंजरा
डीएफओ भटनागर ने बताया कि फ्लोटिंग कैज करीब 10 फीट लंबा और 5 फीट चौड़ा है। इसे रखने के लिए अलग से ट्रॉली भी बनाई गई है। जिसके सहारे पिंजरे को नदी, तालाब व नहरों में आसानी से लगाया जा सकता है। पिंजरे के दोनों ओर एल्यूमिनयम के गोल पाइप लगाए गए हैं, जिससे पिंजरा पानी में नहीं डूबता बल्कि तैरता है। पिंजरे की लागत 65 हजार तथा ट्रॉली निर्माण में 50 हजार रुपए का खर्चा आया है।
हादसों का रहता खतरा
सीवी गार्डन के बोटिंग व जॉय ट्रेन कॉन्ट्रेक्टर शिव शर्मा ने बताया कि गार्डन के तालाब में मगरमच्छ लंबे समय है। जबकि, इसी तालाब में पैदल बोटिंग करवाई जाती है। वहीं, जॉय ट्रेन भी यहीं हैं। ऐसे में लोगों व बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। मगरमच्छ रेस्क्यू को लेकर हमने वन विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे थे। लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इस पर दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित की। जिसकी बदौलत ही वन विभाग के अधिकारियों ने पानी में तैरता पिंजरा बनवाकर मगरमच्छ को पकड़ने में गंभीरता दिखाई।
मगरमच्छ को ट्रैप करने के लिए बांधा 5 किलो मांस
सहायक वनपाल प्रेम कंवर ने बताया कि सीवी गार्डन के तालाब में फ्लोटिंग क्रोकोडाइल केज लगा दिया है। जिसमें मगरमच्छ को ट्रैप करने के लिए करीब 5 किलो मांस भी बांधा है। जैसे ही मगरमच्छ मांस खाने की कोशिश करेगा, वैसे ही वह पिंजरे में कैद हो जाएगा। पिंजरे व मगरमच्छ के मूवमेंट की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। उम्मीद है, जल्द ही मगरमच्छ को ट्रैप कर लिया जाएगा।
मॉर्निंग वॉकर्स में दहशत, बतखों पर कर चुका हमला
सीवी गार्डन में बोटिंग व जॉय ट्रेन संचालन में लगे कर्मचारियों ने बताया कि गत वर्ष 9 दिसम्बरको तालाब में छिपा मगरमच्छ ने बतखों पर हमला कर दिया था। बतखों के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुन स्टाफ व पर्यटक सकते में आ गए थे। मौके पर जाकर देखा तो मगरमच्छ बतखों पर हमला कर रहा था। एक बतख को तो खा गया और दूसरी को लहुलूहान कर दिया। लोगों की आवाजाही होने से मगरमच्छ वापस पानी में चला गया। घटना के बाद से ही लोगों में दहशत है।
इनका कहना
अब तक पानी में मगरच्छ का रेस्क्यू संभव नहीं था लेकिन फ्लोटिंग क्रोकोडाइल केज तैयार होने के बाद अब यह संभव है। हमने सीवी गार्डन में मगरमच्छ को पकड़ने के लिए तालाब में पिंजरा लगा दिया है और उसमें करीब 5 किलो मांस भी बांधा गया है। वन्यजीव विभाग की टीम नियमित मॉनिटरिंग कर रही है। जल्द ही प्रदेश में पहली बार पानी में मगरमच्छ को रेस्क्यू करने में हमें सफलता मिलेगी।
- अनुराग भटनागर, उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग कोटा
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