विधानसभा में विपक्ष का नेता नहीं बनाना लोकतंत्र पर धब्बा : यह सरकार के लिए शर्मनाक, संजय राउत ने कहा- डर से पद देने से मना करना दिखाता है कायरता
सरकार के मनमाने फैसलों को चुनौती देगा
राउत ने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल को डर है कि विपक्ष का नियुक्त किया गया नेता सदन में जनता के मुद्दे जोरदार तरीके से उठाएगा और सरकार के मनमाने फैसलों को चुनौती देगा।
मुंबई। शिवसेना (ठाकरे गुट) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने राज्य विधानसभा में विपक्ष का नेता नहीं बनाने को लोकतंत्र पर धब्बा बताया है। राउत ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां सत्ता में आती हैं, विधानसभा का गठन होता है। वे लोकतंत्र और संविधान से मिले अधिकारों के तहत मंत्री और मुख्यमंत्री जैसे पद संभालती हैं, लेकिन लोकतांत्रिक ढ़ांचे के तहत विपक्ष का नेता नहीं बनाना और उसकी नियुक्ति को रोकना लोकतंत्र की भावना को कमजोर करना है। उन्होंने बताया कि राज्य विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और सदन में विपक्ष का कोई नेता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल राज्य सरकार के लिए बल्कि, केंद्र सरकार के लिए भी शर्मनाक है।
राउत ने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल को डर है कि विपक्ष का नियुक्त किया गया नेता सदन में जनता के मुद्दे जोरदार तरीके से उठाएगा और सरकार के मनमाने फैसलों को चुनौती देगा। उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे डर से पद देने से मना करना कायरता दिखाता है। यह सोच केंद्र से लेकर राज्य तक फैली हुई है। उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर भी निशाना साधा और नियुक्ति के बारे में सही फैसले की उम्मीदों पर शक जताया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस बयान का उल्लेख करते हुए कि विपक्ष का नेता नियुक्त करने का अधिकार अध्यक्ष के पास है, राउत ने मौजूदा हालात में बिना भेदभाव के फैसले की संभावना पर सवाल उठाया।

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