मिशन गगनयान : पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण, 400 किमी अंतरिक्ष मिशन से पहले सुरक्षित लैंडिंग तकनीक साबित
3 अंतरिक्ष यात्री 400 किमी ऊपर जाएंगे
ISRO ने गगनयान मिशन के लिए श्रीहरिकोटा में पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण। चिनूक हेलीकॉप्टर से 3 किमी ऊंचाई पर मॉड्यूल गिराया, जहां 10 पैराशूट खुलकर सुरक्षित समुद्री लैंडिंग सुनिश्चित। मिशन के तहत तीन अंतरिक्ष यात्री 400 किमी ऊपर तीन दिन रहेंगे, वापसी सुरक्षित।
चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए श्रीहरिकोटा में पैराशूट सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए था कि जब हमारे अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष से वापस लौटें, तो उनका यान सुरक्षित तरीके से समुद्र में उतरे। इस खास टेस्ट के लिए भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद ली गई। हेलीकॉप्टर ने गगनयान के क्रू मॉड्यूल जैसे दिखने वाले 5,700 किलोग्राम के एक भारी-भरकम ढांचे को हवा में करीब तीन किलोमीटर की ऊंचाई तक उठाया और वहां से समुद्र में छोड़ दिया। जैसे ही यह मॉड्यूल नीचे गिरने लगा, एक-एक करके 10 पैराशूट एक तय क्रम में खुले। इन पैराशूटों ने मॉड्यूल की गिरने की रफ्तार को इतना कम कर दिया कि वह बहुत ही आराम से समुद्र के पानी से टकराया। इसके बाद भारतीय नौसेना की मदद से मॉड्यूल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
3 अंतरिक्ष यात्री 400 किमी ऊपर जाएंगे :
गगनयान मिशन के तहत भारत का लक्ष्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में भेजना है। ये यात्री वहां तीन दिन बिताएंगे और फिर उन्हें सुरक्षित वापस धरती पर लाया जाएगा। इस मिशन के लिए इसरो ने ह्यएलवीएम-3ह्ण नाम का एक ताकतवर रॉकेट तैयार किया है, जिसे इंसानों को ले जाने के हिसाब से खास तौर पर सुरक्षित बनाया गया है। इसरो के वैज्ञानिकों के साथ-साथ इस मिशन में भारतीय वायुसेना, नौसेना और डीआरडीओ भी कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं।

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