श्रमिकों का वेतन बढ़ाने को लेकर आंदोलन सही : आसमान छूती महंगाई के साथ मजदूरी बढ़ाने की बात वाजिब, राहुल बोले- कर्ज की गहराई में डुबो देती है बेलगाम महंगाई

श्रमिकों द्वारा वेतन बढ़ाने के लिए किए आंदोलन का किया समर्थन

श्रमिकों का वेतन बढ़ाने को लेकर आंदोलन सही : आसमान छूती महंगाई के साथ मजदूरी बढ़ाने की बात वाजिब, राहुल बोले- कर्ज की गहराई में डुबो देती है बेलगाम महंगाई

राहुल गांधी ने नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को जायज बताया, कहा—बढ़ती महंगाई में मजदूरों की आय बढ़ना जरूरी। 12 हजार कमाने वाले श्रमिक किराए और खर्चों से जूझ रहे हैं। उन्होंने 20 हजार न्यूनतम वेतन की मांग का समर्थन किया। श्रम कानून, 12 घंटे कार्य और महंगाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए, आंदोलन को “आखिरी पुकार” बताया।

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नोएडा में श्रमिकों के वेतन बढ़ाने को लेकर किए गए आंदोलन को सही ठहराते हुए कहा है कि आसमान छूती महंगाई के साथ मजदूरी बढ़ाने की बात वाजिब है और उनकी इस मांग पर संवेदनशीलता के साथ ध्यान दिया जाना चाहिए। गांधी ने मंगलवार को सोशल मीडिया एक्स पर नोएडा में कल कई कंपनियों में श्रमिकों द्वारा वेतन बढ़ाने के लिए किए आंदोलन का समर्थन किया और कहा कि जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है, उसके अनुसार उनकी न्यूनतम मजदूरी भी बढ़नी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा, कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वह इस देश के श्रमिकों की आखिरी पुकार थी, जिसकी हर आवाज को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया। नोएडा में काम करने वाले एक मजदूर की 12,000 रुपये मासिक आय में से 4,000-7,000 रुपये किराए में चले जाते हैं। जब तक 300 रुपये की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक 500 रुपये सालाना किराया बढ़ा देता है। आय बढऩे से पहले ही यह बेलगाम महंगाई जीवन का गला घोंट देती है और कर्ज की गहराई में डुबो देती है, यही है विकसित भारत का सच।

उन्होंने आगे लिखा कि एक महिला मजदूर ने कहा कि रसोई गैस के दाम बढ़ते हैं, लेकिन हमारी आय नहीं। इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए 5,000 रुपये तक का गैस सिलेंडर खरीदा होगा। यह केवल नोएडा की बात नहीं है और न ही केवल भारत की। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है। मगर अमेरिका के शुल्क युद्ध, वैश्विक महंगाई और बाधित आपूर्ति शृंखला का बोझ मित्र उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार उस मजदूर पर पड़ी है, जो दिहाड़ी कमाता है और तभी रोज खाता है। वह मजदूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाईजिसने बस काम किया, चुपचाप, बिना शिकायत और अपने अधिकार की मांग करने पर उसे मिलता क्या है। दबाव और अत्याचार।

गांधी ने कहा, एक और महत्वपूर्ण मुद्दा, सरकार ने चार श्रम संहिताएं जल्दबा•ाी में बिना संवाद नवंबर 2025 से लागू कर, कार्य अवधि 12 घंटे तक बढ़ा दी। जो मजदूर प्रतिदिन 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है, फिर भी बच्चों की विद्यालय फीस कर्जा लेकर भरता है, क्या उसकी मांग अनुचित है और जो उसका अधिकार प्रतिदिन छीन रहा है, वह विकास कर रहा है। नोएडा का मजदूर 20,000 रुपये मांग रहा है। यह कोई लालच नहीं,यह उसका अधिकार है, उसके जीवन का एकमात्र आधार है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, मैं हर उस मजदूर के साथ हूं-जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है। गौतरतलब है कि नोएडा में सोमवार को कई निजी कंपनियों के हजारों कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन किया जो देखते ही देखते ही आगजनी, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ में तब्दील हो गया और पुलिस को स्थिति सामान्य बनाने के लिए बल प्रयोग भी करना पड़ा था।

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