भारत में सड़क दुर्घटनाओं के कारण एवं निवारण

अत्यंत चिंतनीय 

भारत में सड़क दुर्घटनाओं के कारण एवं निवारण

भारत में सार्वजनिक परिवहन एवं वाहनों द्वारा होने वाली दुर्घटनाओं की गिनती प्रतिवर्ष बढ़ती ही रही है।

भारत में सार्वजनिक परिवहन एवं वाहनों द्वारा होने वाली दुर्घटनाओं की गिनती प्रतिवर्ष बढ़ती ही रही है, किंतु चार-पांच माहों में ऐसी दुर्घटनायें और विशेषकर सड़क मार्ग पर होनेवाली दुर्घटनाएं अत्यधिक बढ़ी हैं। इन दुर्घटनाओं में सैकड़ों लोगों की दु:खद मृत्यु हुई है, तो कई सौ लोग बुरी तरह घायल होकर विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं के विषय पर भारत देश हमेशा से लज्जित होता रहा है। विशेषकर 2025 के अगस्त माह से लेकर अभी नवंबर माह तक हुई सड़क दुर्घटनाओं ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह असुरक्षित कर दिया है। सबसे अधिक सड़क दुर्घटनायें राजस्थान में हुई हैं। इस प्रदेश के अतिरिक्त हैदराबाद, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश में भी बड़ी सड़क दुर्घटनायें हुई हैं। राजस्थान एवं राजस्थान-मध्य प्रदेश की सीमा पर 5 नवंबर को ही दो-तीन सड़क दुर्घटनाओं में दस-बारह लोगों की मृत्यु हो गई।

तेज गति के कारण :

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में तेज गति से भागती ट्रेन की चपेट में आकर छह नारियों की मृत्यु हुई। इसी दिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जनपद में कोरबा पैंसेजर ट्रेन और एक खड़ी मालगाड़ी की टक्कर में 11 लोग मारे गये व 20 घायल हो गये। इससे पहले सोमवार 3 नवंबर को जयपुर में नशे में धुत डंपर चालक ने 17 वाहनों को टक्कर मारी, जिसमें 13 लोग मारे गये। फलौदी बीकानेर में 1 नवंबर को सड़क दुर्घटना में दो बच्चों सहित 6 लोग मारे गये। अक्टूबर 2025 में भी छोटी-बड़ी अनेक सड़क दुर्घटनायें हुई हैं। इंदौर महानगर के एयरपोर्ट मार्ग पर 15 सितंबर 2025 को एक ट्रक चालक ने 18-20 लोगों को कुचल कर मारा डाला। इससे पूर्व 12 सितंबर को कर्नाटक राज्य के हासन जनपद में गणेश मूर्ति के विसर्जन हेतु जा रहे युवकों के समूह पर एक ट्रक चालक ने ट्रक चढ़ा दिया था। इस दुर्घटना में 8 युवक घटनास्थल पर ही मारे गये तथा 20 से अधिक बुरी तरह घायल हो गए।

अत्यंत चिंतनीय :

Read More द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास बहाली की सार्थक पहल

यदि माह प्रति माह सड़क व रेल दुर्घटनाओं के आंकड़े प्रदर्शित किये जायें, तो सूची बहुत लंबी हो जायेगी। यह स्थिति भारत के सार्वजनिक परिवहन हेतु अत्यंत चिंतनीय एवं भयावह है। दुर्घटनाओं के समाचार पढ़ने वाले तथा दुर्घटनाओं के बाद का सजीव प्रसारण देखने वाले सामान्य लोगों में सड़कों पर यात्रा करने के विषय में एक गुप्त भय परिव्याप्त हो चुका है। ऐसा भय प्रतिक्षण एक प्रकार का तनाव बनाये रखता है। इस कारण रक्तचाप में असंतुलन, वृद्धि अथवा कमी और अनेक मानसिक रोगों में वृद्धि हो रही है। दुर्घटनायें केवल सड़कों या राजमार्गों पर ही नहीं हो रहीं। रेलमार्ग भी असुरक्षित हैं। रेल प्रशासन द्वारा रेल संबंधी गतिविधियों के संबंध में निष्पादित की जा रही कार्यकारी निष्ठा के बाद भी समाज के अराजक तत्वों द्वारा रेल मार्गों या पटरियों के साथ जानबूझकर की जा रही छेड़छाड़ के कारण ही अधिक रेल दुर्घटनायें हुई हैं।

Read More लापता बच्चों की बढ़ती संख्या एक सामाजिक संकट

प्रशासन एवं जनता :

Read More हीटवेव की आहट और खेती पर बढ़ता संकट

सार्वजनिक आवागमन का मार्ग, रेल अथवा वायु परिवहन कोई भी दुर्घटनाओं से रहित नहीं है। किंतु सड़कों पर होनेवाली दुर्घटनाओं की आवृत्ति ने प्रशासन एवं जनता को गहन चिंता में डाल दिया है। सड़क दुर्घटनायें अनेक कारणों से होती रही हैं। इनमें प्रमुख है तेज गति से वाहन चलाना। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक क्षेत्र व लोगों के जीवन के प्रति वाहन चालकों का अनुत्तरदायी व्यवहार भी, दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने की दृष्टि से, एक अविचारित कारण है। मदिरा का सेवन करके अनियंत्रित होकर वाहन चलाने से अब तक सर्वाधिक दुर्घटनायें हुई हैं। सार्वजनिक जीवन में सड़कों, मार्गों एवं विशेषकर चौड़े व आधुनिक नवोन्नत राजमार्गों पर परिवहन की सुसक्रियता, सुरक्षा, दुर्घटना शून्यता एवं त्रुटिहीनता के लिये राजमार्ग मंत्रालय को कुछ नवनीतियां बनानी होंगी। सड़कों पर दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों की पड़ताल करते हुये इनसे जुड़ी हुई प्रकट एवं गुप्त समस्याओं का निराकरण करना होगा। जैसे कि ट्रक चालकों पर ट्रांसपोर्ट कंपनियों का अतिरिक्त दबाव कम करना होगा।

समस्या निराकरण :

चालकों एवं ट्रांसपोर्ट कंपनियों के बीच शासन को समस्या निराकरण हेतु परिणामोन्मुखी समन्वय स्थापित करना होगा। ट्रांसपोर्ट प्रतिष्ठानों के स्वामियों द्वारा नियुक्त अथवा स्वतंत्र रूप में वाहन चलानेवाले, दोनों प्रकार के चालकों के लिये चालन संबंधी निश्चित कार्यकारी घंटे निर्धारित करने होंगे। शासन की ओर से यह प्रयास हो कि सार्वजनिक चालन का दायित्व ग्रहण करनेवाले बस, ट्रक या अन्य वाहनों के चालकों हेतु शासकीय अथवा ट्रांसपोर्ट कंपनियों द्वारा नियमित रूप में स्वास्थ्य कार्यशालायें आयोजित की जाए। इन कार्यशालाओं में चालकों के लिये समाज व सार्वजनिक जीवन में दायित्व निर्वहन से संबद्ध रचनात्मक गतिविधियों की प्रतियोगिता की व्यवस्था की जाए। संभव हो तो ऐसी प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन करनेवाले चालकों को पुरस्कार प्रदान किये जाए। चालकों के लिये वाहन चालनावधि में मदिरा का सेवन न करने के लिये भी अनेक प्रोत्साहनपरक उपाय किये जाएं।

अत्यंत महत्वपूर्ण है :

इस विचार पर केंद्रित किया जाए कि उनका चालन-कार्य वास्तविक रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें वाहन चलाते समय अपने महत्ती कार्य का संज्ञान हो। इस हेतु बारंबार उन्हें सूचित किया जाए कि सार्वजनिक वस्तुओं को लाने-ले जाने के उनके उपयोगी कार्य के कारण ही लोगों तक उद्योगों द्वारा निर्मित वस्तुयें पहुंच पाती हैं। मनोवैज्ञानिक स्तर पर समझा जाए। यदि पब्लिक कैरियर के चालकों को सावधानीपूर्ण ढंग से विश्वास दिलाया जाए कि लोगों की दृष्टि में उनका कार्य अतिशय महत्व का है, तो निश्चित रूप में उनका चालन-व्यवहार सार्वजनिक उत्तरदायित्व से पूर्ण हो जायेगा तथा परिणाम में परस्पर मानवीय ईर्ष्या व दुर्भावनाओं के कारण होनेवाली सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

-विकेश कुमार बडोला
यह लेखक के अपने विचार हैं।

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

निजीकरण के विरोध में जलदाय कर्मचारी कल करेंगे जलभवन का घेराव, हजारों कर्मचारी होंगे शामिल निजीकरण के विरोध में जलदाय कर्मचारी कल करेंगे जलभवन का घेराव, हजारों कर्मचारी होंगे शामिल
प्रान्तीय नल मजदूर यूनियन (इंटक) के आह्वान पर जलदाय विभाग के हजारों कर्मचारी जलभवन पर ओएंडएम निजीकरण के विरोध में...
रसोई गैस और तेल की किल्लत का यह शुरुआती दौर : एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने की  संभावनाओं पर ध्यान दें सरकार, राहुल गांधी बोले- तैयारी नहीं की तो करोड़ों लोगों का होगा नुकसान
पेंटागन की रिपोर्ट में खुलासा : ईरान पर हमले में अमेरिका ने 6 दिन में फूंक डाले 11.3 अरब डॉलर, विशेषज्ञों का कहना- अमेरिकी बजट और घरेलू राजनीति के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है युद्ध का खर्च
सर्राफा बाजार में गिरावट : चांदी और शुद्ध सोना हुआ सस्ता, जानें क्या है भाव  
कंडम वाहन भी दे गए निगम को डेढ़ करोड़ रुपए, 12 साल बाद हुई निगम के कंडम वाहनों व स्क्रेप की नीलामी
कहीं वाटर नहीं तो कहीं कूलर ही गायब, भीषण गर्मी में बदहाल शहर के वाटर कूलर
सीढ़ियों से जंग : पेंशन की राशि लेने में हाफंते 38 सौ बुजुर्ग पेन्शनधारी, जानें पूरा मामला