कहीं वाटर नहीं तो कहीं कूलर ही गायब, भीषण गर्मी में बदहाल शहर के वाटर कूलर

जहां वाटर है वहां पानी कूल नहीं

कहीं वाटर नहीं तो कहीं कूलर ही गायब, भीषण गर्मी में बदहाल शहर के वाटर कूलर

इन वाटर कूलरों के चालू नहीं होने से पानी भी गर्म आ रहा है जो पानी पीने लायक ही नहीं है।

कोटा। दृश्य एक : शॉपिंग सेंटर में एक्सिस बैंक के पास वाटर कूलर का स्ट्रक्चर बना हुआ है। वर्ष 2018 में करीब 88 हजार रुपए की लागत से यहां वाटर कूलर लगाया गया था। अब वहां पानी के लिए टंकी तो रखी हुई है। लेकिन कूलर ही नहीं है। जिससे आमजन वहां गर्मी में ठंडा पानी पी सके।

दृश्य दो : फर्नीचर मार्केट में बड़ा भारी वाटर कूलर व्यापार संघ की ओर से लगाया गया था। जिससे यहां आने वाले लोगों को ठंडा पानी मिल सके। लेकिन वर्तमान में यह पूरी तरह की बदहाल हो चुका है। जिससे इसका पीने के पानी के रूप में नहीं विज्ञापन बोर्ड के रूप में उपयोग हो रहा है।

दृश्य तीन : गुमानपुरा में मल्टीपरपज स्कूल की चार दीवारी के सहारे एक वाटर कूलर तो लगा हुआ है। लेकिन उसकी हालत ऐसी है कि वह आमजन के लिए पीने के पानी के रूप में उपयोग नहीं आ रहा है। जिससे इसके होने न होने का फिलहाल कोई लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है।

ये तो उदाहरण मात्र हैं शहर के उन वाटर कूलरों की स्थिति बताने के लिए जिनकी वर्तमान में भीषण गर्मी पड?े पर सबसे अधिक जरूरत है। जबकि उनकी स्थिति ऐसी है कि वे उपयोग लायक ही नहीं है। ऐसे शहर में सैकड़ों वाटर कूलर हैं। जिनमें से अधिकतर चालू हालत में नहीं हैं। कहीं पानी की टंकी नहीं हैं तो कहीं पानी की टंकी है तो उसे ठंडा करने वाली मशीन ही नहीं है। कहीं टंकी और मशीन है तो पानी ठंडा नहीं आ रहा है। जिससे इस भीषण गर्मी में लोग इन वाटर कूलरों का पानी नहीं पी पा रहे हैं।शहर में गर्मी तेज पड?े और आगामी दिनों में मौसम को देखते हुए एक दिन पहले ही जिला कलक्टर ने पीने के पानी समेत छाया और लोगों को गर्मी से राहत के इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।

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हर जगह बदहाली
शहर में वैसे तो जगह-जगह पर और हर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर वाटर कूलर लगे हुए हैं। फिद्दर चाहे वह विधायक कोष से लगाए गए हों या नगर निगम के माध्यम से। किसी समाजसेवी द्वारा या स्वयंसेवी संस्थाओं और व्यापार संघों के माध्यम से लगे हों। मुख्य मार्गों पर लगे हों या धार्मिक स्थान मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या फिर पार्क व बाजारों में लगे हों। सभी जगह लगे वाटर कूलरों में से अधिकतर बदहाली का शिकार हो रहे हैं। नए शहर के अंतिम छोर से लेकर स्टेशन तक सभी जगह पर वाटर कूलर लगे हुए हैं।

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तापमान 38 डिग्री तो उबल रहा पानी
वाटर कूलर का मतलब ठंडा पानी है। लेकिन जिस तरह से शहर में अभी 38 डिग्री से अधिक तापमान चल रहा है। ऐसे में जहां नलों में व टंकी का पानी ही गर्म व उबल रहा है। वहीं इन वाटर कूलरों के चालू नहीं होने से उनका पानी भी गर्म आ रहा है। जिससे अधिकतर वाटर कूलरों का पानी पीने लायक ही नहीं है।

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लगाने के बाद ध्यान ही नहीं
जानकारों के अनुसार किसी स्वयंसेवी संस्था या समाजसेवी द्वारा अपने परिजनों की स्मृति या विशेष अवसरों पर वाटर कूलर लगा तो दिए जाते हैं। जिससे कुछ समय तक तो वे सही रहते हैं। लेकिन उसके बाद उनका कोई ध्यान नहीं रखता। जिससे कभी बिजली कनेक् शन नहीं मिलने या कभी नल गायब होने, पानी नहीं मिलने या टंकी की सफाई नहीं होने समेत कई कारणों से कुछ ही समय में वे वाटर कूलर काम में लेने लायक ही नहीं रहते।

गर्मी से पहले होने चाहिए चालू
लोगों का कहना है कि वाटर कूलर का साल में सबसे अधिक उपयोग गर्मी के इन तीन महीनों में ही होता है। जब गर्मी में ही वाटर कूलर खराब या बंद हैं तो उनके होने न होने का कोई लाभ ही नहीं है। नगर निगम या संबंधित एजेंसी को गर्मी से पहले ही इनकी मेंटेनेंस करवाकर चालू हालत में करने चाहिए। जिससे गर्मी में इनका उपयोग हो सके।

दादाबाड़ी निवासी महेश खींची का कहना है कि जो भी संस्था या व्यक्ति वाटर कूलर लगवाए उसकी जिम्मेदारी है उसकी मेंटेनेंस की भी व्यवस्था करे। महावीर नगर निवासी राकेश नागर ने बताया कि गर्मी में दूर दराज से आने वाले लोग विशेष रूप से महिलाएं या मजदूर वर्ग के लोग वाटर कूलर का पानी पीते हैं। लेकिन उन्हें वर्तमान में अधिकतर जगह पर इन वाटर कूलरों का गर्म पानी पीना पड़ रहा है।

इनका कहना है
नगर निगम सीमा क्षेत्र चाहे शहर हो या कैथून तक के ग्रामेण इलाकों में करीब आठ सौ वाटर कूलर लगे हुए हैं। इनमें विधायक कोष, नगर निगम या अन्य माध्यमों से लगाए गए वाटर कूलर शामिल हैं। इनकी मेंटेनेंस का टेंडर कर दिया है। पहले सिंगल बिड आने से उसे निरस्त करना पड़ा था। दोबारा से टेंडर किया है जो एक सप्ताह के भीतर खुल जाएगा। साथ ही निगम के माध्यम से वाटर कूलरों का सर्वे कराया जा रहा है। जिनकी शिकायत आ रही है उन्हें फिलहाल निगम स्तर पर चाली किया जा रहा है। दो साल के लिए मेंटेनेंस का करीब दो करोड़ रुपए से अधिक का टेंडर किया गया है।
- सचिन यादव, अधिशाषी अभियंता(विद्युत), नगर निगम कोटा

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