सूखी घास व कचरा, गर्मी में आग का खतरा

अप्रैल से जून तक तापमान होता है अधिक

सूखी घास व कचरा, गर्मी में आग का खतरा
हर साल हो रही आग लगने की घटनाएं,शहर में ट्रांसफार्मरों के पास लगा है कचरे का अम्बार।

कोटा। आने वाले तीन महीने अप्रैल से जून में तापमान अधिक होने पर गर्मी भी भीषण पड़ती है। ऐसे में शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं भी अधिक होती है। ऐसे में ट्रांसफार्मरों में लगने वाली आग से आमजन अधिक प्रभावित होते हैं। हालत यह है कि ट्रांसफार्मरों के आस-पास कचरा व सूखी घास आग का बढ़ना कारण बनते हैं। शहर में आमजन की सुविधा के लिए बिजली कम्पनी ने एक निर्धारित दूरी पर ट्रांसफार्मर लगाए हुए हैं। वहीं आमजन को इसके खतरे से बचाने के लिए सभी ट्रांसफार्मर को जमीन से काफी ऊंचाई पर रखा गया है। साथ ही इनकी सुरक्षा के लिए उनके चारों तरफ लोहे की जाली की फेसिंग भी की हुई है। लेकिन हालत यह है कि अधिकतर ट्रांसफार्मर के आस-पास लोगों द्वारा कचरा डालने व वहां उगी सूखी घास गर्मी में आग लगने का बड़ा कारण बन रही हैं।

यहां है बुरी स्थिति

शहर में वैसे तो सैकड़ों की संख्या में ट्रांसफार्मर हैं। उनमें से कई जगह ऐसी हैं जहां ट्रांसफार्मर के आस-पास कचरा व सूखी घास है। जिनमें थोक फल सब्जीमंडी के बाहर हो या फर्नीचर मार्केट शॉपिंग सेंटर, नई धानमंडी के पास मोटर मार्केट हो या किशोर सागर तालाब की पाल। बंगाली कॉलोनी छावनी समेत कई अन्य स्थानों पर यही हालत है।

 

Read More नए वार्ड, पुरानी समस्याएं : 10 से 15 किलोमीटर में फैले वार्ड, सुविधाएं अब भी दूर

मुख्य मार्गों पर लगा रही सीमेंट जाली

Read More असर खबर का : खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, 390 किलो संदिग्ध घी सीज़, मावा-पनीर के 4 सैंपल लिए

कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में मुख्य मार्गों पर लगे ट्रांसफार्मरों पर तो सीमेंट की जाली लगाई जा रही है। जिससे न तो कोई उनमें आसानी से घुस सकेगा। साथ ही उन जालियों से कचरा भी अंदर नहीं फेका जा सकता। जिससे आग लगने का खतरा भी कम हो गया है। लेकिन कॉलोनियों व अंदरूनी क्षेत्रों के ट्रांसफार्मरों के लिए अभी भी खतरा बना हुआ है।

Read More बुनियादी सुविधाओं का अभाव : टूटी सड़कें, अंधेरा और कचरे के ढेर की कड़वी सच्चाई

सभी जगह सुरक्षा, सफाई निगम का जिम्मा

निजी बिजली कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि सभी ट्रांसफार्मरों पर कम्पनी की ओर से लोहे की रैलिंग से सुरक्षा की हुई है। ट्रांसफार्मर भी जमीन से ऊपर हैं। जिससे करंट का खतरा भी नहीं है। लेकिन इनके आस-पास सूखी घास व कचरा लोग ही डाल रहे हैं। कई बार कचरे में आग लगने पर वह पैनल के माध्यम से ट्रांसफार्मर तक पहुंच जाती है। जिससे नुकसान का खतरा रहता है। कचरा व घास की सफाई का जिम्मा निगम कर्मचारियों का है।

 

सफाई होने के बाद डाला जाता है कचरा

नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी मोतीलाल चौधरी ने बताया कि बरसात के समय में ट्रांसफार्मर के आस-पास घास उग जाती है। साथ ही कचरा भी लोग डाल देते हैं। हालांकि निगम की ओर से उसकी सफाई की जाती है। लेकिन कई बार तारों में करंट के चलते सफाई कर्मी ट्रांसफार्मर के नजदीक सफाई नहीं कर पाते। प्रयास करेंगे कि ट्रांसफार्मर के आस-पास भी अच्छी तरह सफाई हो और वहां कचरा एकत्र ही नहीं हो जिससे आग का खतरा बने।

तापमान अधिक होने से लगती है आग

नगर निगम के सीएफओ राकेश व्यास का कहना है कि अप्रैल से जून के तीन महीने में तापमान अधिक होने से गर्मी पड़ती है। ऐसे में कई बार सूखी घास व कचरे में आग लग जाती है। घास व कचरा ट्रांसफार्मर के नजदीक होने से उससे ट्रांसफार्मर में आग लग जाती है। जिससे लाइट बंद कर आग बुझाने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं कई बार लोग जलती वस्तु डाल देते हैं। जिससे भी आग लग जाती है।

 

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

मेलोडे होटल में ऑनलाइन जुआ-सट्टे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, तीन आरोपी पकड़े मेलोडे होटल में ऑनलाइन जुआ-सट्टे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, तीन आरोपी पकड़े
वैशाली नगर स्थित मेलोडे होटल के कमरा नंबर 204 में पुलिस ने दबिश देकर दो युवकों और एक युवती को...
जातिगत जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया जनता के साथ धोखा, बिहार-तेलंगाना मॉडल लागू करने की मांग: जयराम रमेश
राजस्थान में सड़क सुरक्षा पर खर्च बढ़ा: हादसों में कमी नहीं, सड़क सुरक्षा पर लगातार बढ़ा फोकस; लेकिन दुर्घटनाओं का आंकड़े चिंताजनक
विद्याधरनगर में चाकूबाजी के बाद युवक की मौत, आरोपी की तलाश तेज
108 देशों की छात्राओं का अंतरिक्ष मिशन तैयार, ‘माल्य’ थर्मल कैमरा अंतरिक्ष से धरती के तापमान पर रखेगा नजर लगातार
म्यांमार में रोहिंग्या पर अत्याचार जारी, यूएन रिपोर्ट में अराकान आर्मी और सेना पर गंभीर आरोप
खड़गे-राहुल ने पीएम को लिखा संयुक्त पत्र: जाति जनगणना की प्रक्रिया पर जताई चिंता, प्रमाणित जाति सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग