राजस्थान न्यायिक सेवा के अधिकारियों को कार खरीदने के लिए सॉफ्ट लोन सुविधा में संशोधन, वित्त विभाग ने जारी किए नए दिशा-निर्देश
कर्तव्यों के निर्वहन में सुविधा होगी
राजस्थान सरकार ने न्यायिक सेवा अधिकारियों के कार खरीद सॉफ्ट लोन दिशा-निर्देश संशोधित। अब अधिकारी हर 10 वर्ष में नई कार के लिए आवेदन कर सकते। 2016 के बाद लिए गए लोन पर ब्याज रिइम्बर्समेंट संभव। ब्याज सबवेंशन सेवा अवधि तक ही मिलेगा।
जयपुर। राज्य सरकार ने राजस्थान न्यायिक सेवा के अधिकारियों को कार खरीदने के लिए दी जाने वाली सॉफ्ट लोन (एडवांस) सुविधा के दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। वित्त विभाग (नियम प्रभाग) ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
वित्त विभाग के आदेश के अनुसार सरकार की स्क्रैपिंग नीति को ध्यान में रखते हुए अब न्यायिक सेवा के अधिकारी हर 10 वर्ष में एक बार नई कार खरीदने के लिए कार लोन के लिए पुनः आवेदन कर सकेंगे। इससे पहले इस संबंध में 23 जनवरी 2025 को जारी आदेश के तहत सॉफ्ट लोन सुविधा के दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए थे। नए आदेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि 1 जनवरी 2016 के बाद कार लोन लेने वाले न्यायिक अधिकारी अपने बैंक खाते के विवरण सहित कार लोन पर चुकाए गए ब्याज का विवरण प्रस्तुत कर सकेंगे। ऐसे मामलों में सरकार द्वारा वहन किए जाने वाले ब्याज के हिस्से की प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) की जाएगी।
इसके अलावा यह स्पष्ट किया गया है कि कार खरीदने के लिए सॉफ्ट लोन पर ब्याज सबवेंशन की सुविधा केवल उसी अवधि तक लागू रहेगी, जब तक संबंधित न्यायिक अधिकारी सेवा में कार्यरत रहेगा। सेवा से अलग होने के बाद यह सुविधा स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
वित्त सचिव (बजट) कुमार पाल गौतम द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार संशोधित प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे न्यायिक अधिकारियों को वाहन खरीदने में वित्तीय सहायता मिलेगी और उन्हें कर्तव्यों के निर्वहन में सुविधा होगी।

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