अजमेर दरगाह में मंदिर होने सम्बंधी वाद सुनवाई के लिए स्वीकार, तीन प्रतिवादियों को नोटिस

अगली सुनवाई 20 दिसंबर को

अजमेर दरगाह में मंदिर होने सम्बंधी वाद सुनवाई के लिए स्वीकार, तीन प्रतिवादियों को नोटिस

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय नई दिल्ली और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।

अजमेर। सिविल न्यायालय के न्यायाधीश मनमोहन चंदेल ने बुधवार को ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर में संकट मोचन महादेव मंदिर होने और उसमें पूजा-अर्चना का अवसर देने के मामले में पेश वाद पर प्रतिवादी दरगाह कमेटी दरगाह हजरत ख्वाजा साहब, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय नई दिल्ली और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है। 
मामले में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी। वादी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने अदालत में पेश 38 पेज के वाद में बताया कि दरगाह परिसर में संकट मोचन महादेव मंदिर है। साथ ही दरगाह में किए गए निर्माण को अवैध बता कब्जे हटाने और मंदिर में पूजा-अर्चना का अधिकार दिलाने की मांग की गई है। याचिका में सेवानिवृत्त न्यायाधीश हरविलास शारदा की 1911 में लिखी गई किताब अजमेर हिस्टॉरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव का हवाला देते दरगाह के निर्माण में मंदिर का मलबा होने का दावा, गर्भगृह और परिसर में जैन मंदिर होने की बात कही गई है। दिल्ली के एडवोकेट रामस्वरूप बिश्नोई ने बताया दरगाह की बनावट और शिव मंदिर के प्रमाण के संबंध में सबूत भी पेश किए गए हैं। याचिका में मध्यप्रदेश में धार इलाके की भोजशाला, बनारस और अन्य जगहों का उदाहरण भी दिया गया है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग करे जांच
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुप्ता ने बताया कि दरगाह के बुलंद दरवाजे पर हिन्दू परंपरा की नक्काशी की गई है। जहां शिव मंदिर होता है, वहां झरना, पेड़ जरूर होते हैं। ये सभी आसपास हैं, भारतीय पुरातत्व विभाग जांच करे। 

गेट के बाहर तख्ती लेकर खड़ा हुआ युवक
अदालत के गेट के बाहर ब्यावर निवासी ललित शर्मा ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ लिखी तख्ती लेकर खड़ा हो गया। पहले वह अदालत परिसर के अंदर आ गया, जहां से पुलिसकर्मियों ने उसे परिसर से बाहर निकाल दिया।

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