जेकेसीए घोटाले में फारूक अब्दुल्ला को बड़ी राहत: अदालत ने गैर-जमानती वारंट वापस लिया, 30 मार्च को होगी अगली सुनवाई
फारूक अब्दुल्ला का गैर-जमानती वारंट वापस
श्रीनगर की अदालत ने जेकेसीए घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट वापस ले लिया है। जम्मू में हुए हमले के कारण अब्दुल्ला सुनवाई में शामिल नहीं हो सके थे। सीबीआई द्वारा ₹43 करोड़ के गबन की जांच वाले इस मामले की अगली सुनवाई अब 30 मार्च को होगी।
श्रीनगर। श्रीनगर की एक अदालत ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) घोटाले के सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ पहले जारी किये गये गैर-जमानती वारंट को वापस ले लिया है। अदालत ने अब्दुल्ला के अधिवक्ता इश्तियाक खान द्वारा कार्यवाही में उनकी अनुपस्थिति का कारण बताते हुए एक आवेदन दायर करने के बाद यह निर्णय लिया। खान ने अदालत को बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री एक दिन पहले जम्मू में उन पर हुए 'कातिलाना हमले' से सदमे के कारण सुनवाई में शामिल नहीं हो सके हैं।
खान ने दलील दी कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष इस घटना के बाद की स्थितियों के कारण शारीरिक रूप से या वर्चुअल मोड के माध्यम से पेश होने में असमर्थ थे। अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने शुरू में एक नियमित छूट का आवेदन दायर किया था, लेकिन जब अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया, तो उन्होंने वारंट को वापस लेने की मांग करते हुए एक विस्तृत आवेदन दिया और अब्दुल्ला की अनुपस्थिति के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट भी किया।
खान ने बताया कि अदालत ने दलील स्वीकार कर ली और तुरंत वारंट वापस ले लिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह का रिकॉल उसी अदालत द्वारा किया जाना होता है जिसने वारंट जारी किया हो। अब इस मामले पर अगली सुनवाई निर्धारित तिथि 30 मार्च को होगी। श्रीनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तबस्सुम ने करोड़ों रुपये के जेकेसीए वित्तीय अनियमितता मामले में अब्दुल्ला के खिलाफ गुरुवार को गैर-जमानती वारंट जारी किया था। यह वारंट इसलिए जारी किया गया था क्योंकि वह व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन अदालत में पेश होने में विफल रहे थे।
इस कथित घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है, जिसने 2018 में श्री अब्दुल्ला और कई अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) को दिए गए अनुदान में से लगभग 43 करोड़ रुपये का कथित रूप से गबन करने के लिए आरोप पत्र दायर किया था।

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