पंचायत चुनावों में देरी : आयोग नहीं विभाग जिम्मेदार, निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज चुनाव को लेकर पत्र लिखकर चेताया

पंचायतीराज विभाग के अफसर जिम्मेदार होंगे

पंचायत चुनावों में देरी : आयोग नहीं विभाग जिम्मेदार, निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज चुनाव को लेकर पत्र लिखकर चेताया
पंचायत चुनावों में देरी पर राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज विभाग को चेताया है कि चुनाव नहीं हुए तो कोर्ट अवमानना के लिए विभागीय अफसर जिम्मेदार होंगे। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न मिलने से वार्ड तय नहीं हो पाए। आयोग ने सुझाव दिया है कि जरूरत पड़ने पर एससी-एसटी को छोड़ बाकी सीटें सामान्य घोषित कर चुनाव कराए जा सकते हैं।

जयपुर। पंचायत चुनावों में देरी को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज विभाग को पत्र लिखकर कोर्ट के आदेशों की अवमानना होने पर विभागीय अफसरों के जिम्मेदार होने की बात कही है। प्रदेश में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलने पर पंचायतीराज चुनाव में देरी को देखते हुए पत्र में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के मुताबिक अप्रैल तक पंचायतीराज चुनाव नहीं हुए तो कोर्ट अवमानना की कार्रवाई के लिए पंचायतीराज विभाग के अफसर जिम्मेदार होंगे।

पंचायतीराज संस्थाओं में ओबीसी के आरक्षण वाले वार्ड छांटकर उनकी रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। इस कारण आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने पत्र लिखकर विभाग को चेताते हुए कहा है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण ओबीसी वार्ड तय नहीं हो पाए हैं। इससे निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं कर पा रहा है। आयोग ने ओबीसी आरक्षण तय नहीं होने पर भी पंचायतीराज चुनाव कराने का कानूनी उपाय भी सुझाया है।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2022 में सुरेश महाजन बनाम मध्यप्रदेश सरकार के केस में दिए आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि यदि ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट की औपचारिकता पूरी नहीं होती तो एससी-एसटी के अलावा बचे हुए पदों को सामान्य श्रेणी में अधिसूचित किया जाएगा, फिर निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। पत्र में लिखा है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने शीला कुमारी बनाम राज्य सरकार मामले में पंचायतीराज चुनाव की कार्रवाई अप्रैल तक अनिवार्य रूप से पूरे करने का आदेश दिया है। ऐसे में आरक्षण सूचना की वजह से चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हो पाया तो कोर्ट अवमानना की जिम्मेदारी पंचायतीराज विभाग की होगी।

प्रदेश में ग्राम पंचायतों की स्थिति

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प्रदेश में 14,699 ग्राम पंचायतों में चार करोड़ दो लाख 20 हजार 734 वोटर्स हैं। इनमें दो करोड़ आठ लाख 62 हजार 380 पुरुष मतदाता, एक करोड़ 93 लाख 58 हजार 147 महिला मतदाता, 207 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग चुनाव कराने के लिए फाइनल वोटर लिस्ट, ईवीएम और बैलेट बॉक्स व्यवस्था, ट्रेनिंग आदि तैयारियां पूरी कर चुका है।

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