पुलिया निर्माण में जल निकासी बाधित होने का खतरा, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
सेतकोलू में पुलिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने समाधान की रखी मांग
स्पान पुलिया के रूप में बनाने की मांग।
छीपाबड़ौद। छीपाबड़ौद तहसील क्षेत्र के सेतकोलू गांव में पीडब्ल्यूडी द्वारा पुलिया निर्माण कार्य किया जा रहा है, लेकिन इस निर्माण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में असंतोष देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया के निर्माण में पाइप का उपयोग किया जा रहा है, जो खाल में आने वाले भारी जलप्रवाह को सहन करने में सक्षम नहीं होगा। इसी को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को पत्र प्रेषित कर पुलिया को स्पान पुलिया के रूप में बनाने की मांग की है, जिससे जलनिकासी सुचारू बनी रहे और भविष्य में आवागमन बाधित न हो।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
ग्रामवासियों ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को पत्र सौंपा है और पुलिया को स्पान पुलिया के रूप में बनाने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि स्पान पुलिया बनने से जलनिकासी बेहतर होगी और भविष्य में किसी भी प्रकार की अवरोधक स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। इस मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता बनवारीलाल मीणा ने भी हस्तक्षेप करते हुए उपखंड अधिकारी एवं तहसीलदार को मामले से अवगत कराया।उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस विषय को प्राथमिकता दी जाए और ग्रामीणों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पुलिया निर्माण में आवश्यक सुधार किए जाएं।
ग्रामीणों की चिंता: वर्षा ऋतु में होगा जलभराव
ग्रामवासियों का कहना है कि यह क्षेत्र वर्षा ऋतु में भारी जलभराव का सामना करता है। खाल में पानी की आवक अत्यधिक होने के कारण, यदि पुलिया का निर्माण पाइप के माध्यम से किया जाता है, तो यह जल्द ही अवरुद्ध हो सकती है। जंगल से बहकर आने वाले झाड़, कचरा और अन्य सामग्री पाइप में फंस सकती है, जिससे पानी का प्रवाह रुक सकता है और पुलिया के ऊपर से बहने की स्थिति बन सकती है। ऐसी परिस्थिति में सड़क मार्ग बाधित हो सकता है, जिससे ग्रामीणों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
ग्रामीणों की मांग: सुरक्षित और स्थायी समाधान
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सेतकोलू और आसपास के कई गांवों के लोग इस मार्ग का उपयोग दैनिक आवागमन के लिए करते हैं। यदि पुलिया को वर्तमान योजना के अनुसार पाइप के माध्यम से बनाया जाता है, तो बरसात के मौसम में पानी के दबाव से यह क्षतिग्रस्त हो सकती है। इसलिए ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए और पाइप पुलिया के बजाय मजबूत स्पान पुलिया का निर्माण किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और पुलिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।
ग्रामीणों की मांग जायज है। पुलिया के निर्माण में मजबूत संरचना होनी चाहिए ताकि भारी जलप्रवाह के समय कोई समस्या न हो। हमने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि इसे स्पान पुलिया के रूप में बनाया जाए। जिससे जलनिकासी सुचारू बनी रहे और भविष्य में आवागमन बाधित न हो। प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
- बनवारीलाल मीणा, पंचायत समिति सदस्य, छीपाबड़ौद।
हम ग्रामीणों की आवाज हैं और हमारी यही अपील है कि पुलिया को स्पान पुलिया के रूप में बनाया जाए। पाइप से बनी पुलिया भारी जलप्रवाह को सहन नहीं कर पाएगी, जिससे बारिश के समय हमारे गांव की राहें अवरुद्ध हो जाएगी। जिला प्रशासन हमारी समस्या को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्यवाही करें ताकि न केवल जलनिकासी सुचारू रहे, बल्कि हमारा दैनिक आवागमन भी सुरक्षित और निर्बाध हो सके।
- राजकिशोर मालव, ग्रामीण।
हम ग्रामीण हैं और हमारी समस्या वास्तविक है। पुलिया के निर्माण में पाइप का उपयोग करते समय यह ध्यान नहीं रखा गया कि भारी जलप्रवाह को सहन करने में यह सक्षम नहीं है। आवागमन में कोई बाधा न आए। जिला प्रशासन से अनुरोध है कि हमारी समस्या का तुरंत समाधान किया जाए।
- मदनलाल भील, ग्रामीण।
मामले का पता चला है। सहायक अभियंता को मौका मुआयना के लिए निर्देशित किया है। यदि संभव होगा तो उच्च अधिकारीयों को सूचित कर निर्माण कराया जाएगा।
- नरेंद्र चौधरी, अधिशासी अभियंता, छबड़ा।
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