मलेरिया नियंत्रण के लिए क्रैश कार्यक्रम शुरू : मलेरिया को लेकर चिकित्सा विभाग अलर्ट, जिले में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए 14 मई तक चलेगा विशेष अभियान

जनता को मलेरिया से बचाव के प्रति किया जाएगा जागरूक

मलेरिया नियंत्रण के लिए क्रैश कार्यक्रम शुरू : मलेरिया को लेकर चिकित्सा विभाग अलर्ट, जिले में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए 14 मई तक चलेगा विशेष अभियान

राज्य में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया क्रैश कार्यक्रम 2025 (प्रथम चरण) की शुरुआत की है

जयपुर। राज्य में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया क्रैश कार्यक्रम 2025 (प्रथम चरण) की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम 14 मई तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने और मलेरिया सहित अन्य मच्छर जनित रोगों से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम डॉ. रवि शेखावत ने बताया कि मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने और राज्य को मच्छर जनित रोगों से मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिले में 14 मई तक चलाए जा रहे इस अभियान के तहत मच्छर प्रजनन स्थलों पर विभिन्न नियंत्रण उपायों को अपनाया जाएगा, जिनमें प्रमुख रूप से सोर्स रिडक्शन के माध्यम से मच्छरों के संभावित प्रजनन स्थलों को समाप्त किया जाएगा। एन्टीलार्वल और एन्टी एडल्ट गतिविधियाँ, लार्वा और व्यस्क मच्छरों को नष्ट करने के लिए उचित दवाओं का छिड़काव किया जाएगा। जनता को जागरूक करने के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग कर व्यापक स्तर पर आईईसी गतिविधियां संचालित की जायेगी। ड्राई-डे व लार्वा प्रदर्शन के माध्यम से समुदाय को मच्छर जनित रोगों से बचाव की जानकारी प्रदान करने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से जनता को मलेरिया से बचाव के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत सभी ब्लॉक स्तर पर समस्त प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए जिला स्तर से चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।

डिप्टी सीएमएचओ( हेल्थ) जयपुर प्रथम डॉ. इंद्रा गुप्ता  ने बताया कि मलेरिया क्रैश प्रथम चरण के कार्यक्रम के तहत ब्लॉक स्तर पर पॉजिटिव केसों के लिए समयबद्व सोर्स रिडक्शन, एन्टीलार्वल, एन्टी एडल्ट व विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के आयोजन करने के साथ ही बायोलॉजिकल कंट्रोल की रणनीति को भी अपनाया जाएगा। इसके तहत हैचरी को सक्रिय किया जाएगा ताकि प्राकृतिक रूप से मच्छरों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके। स्थायी जल स्रोतों में गम्बुशिया मछलियों को छोड़ा जाएगा, जो मच्छरों के लार्वा का सेवन कर उनके प्रसार को रोकने में सहायक होती हैं।

Post Comment

Comment List

Latest News

धौलपुर लिफ्ट और कालीतीर परियोजनाओं के लिए 950 करोड़ का प्रावधान, तेजी पर कार्य धौलपुर लिफ्ट और कालीतीर परियोजनाओं के लिए 950 करोड़ का प्रावधान, तेजी पर कार्य
इस योजना में अब तक 171 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जबकि कुल 197.94 करोड़ रुपए व्यय कर...
मध्य प्रदेश में हादसा : सफाई के लिए कुएं में गए लोग दलदल में फंसे, 8 ग्रामीणों की मौत
मोबाइल स्नैचर गिरफ्तार, मोबाइल झपट्टे से छीनकर स्कूटी से फरार होकर देते हैं वारदात को अंजाम
असर खबर का - अब पानी में ही मगरमच्छ को दबोचेगा वन्यजीव विभाग
राजकार्य में लापरवाही पर अधीक्षण अभियंता को पद से हटाया, सीसीए नियम 1958 के तहत होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती : परीक्षा के पैटर्न में बड़ा बदलाव, कर्मचारी चयन बोर्ड ने राजस्थान जीके का वेटेज किया 41 फीसदी
अंडमान के प्रतिबंधित इलाके में घुसा अमेरिकी नागरिक : 3 दिन की हिरासत में, पुलिस ने जब्त किया कैमरा