सपनों की अमूर्त दुनिया : आरआईसी में कला प्रदर्शनी ने गाँव, स्मृति और शांति को दिया नया रूप
स्थान और बनावटों के जरिए उन अनुभूतियों को किया जीवंत
आरआईसी में चल रही कला प्रदर्शनी इन दिनों दर्शकों को एक अनोखी भावनात्मक और दृश्य यात्रा पर ले जा रही। ‘सपनों में भटकना’ थीम पर आधारित यह प्रदर्शनी अमूर्त कला के माध्यम से बचपन, स्मृतियों और ग्रामीण जीवन की गहराइयों को उकेरती है।
जयपुर। आरआईसी में चल रही कला प्रदर्शनी इन दिनों दर्शकों को एक अनोखी भावनात्मक और दृश्य यात्रा पर ले जा रही है। ‘सपनों में भटकना’ थीम पर आधारित यह प्रदर्शनी अमूर्त कला के माध्यम से बचपन, स्मृतियों और ग्रामीण जीवन की गहराइयों को उकेरती है। कलाकार ने अपनी कृतियों में रेखाओं, स्थान और बनावटों के जरिए उन अनुभूतियों को जीवंत किया है, जो शब्दों से परे हैं। परिचित आकृतियाँ यहां एक नए रूप में सामने आती हैं—जहां वे आकार से आगे बढ़कर भावनाओं का माध्यम बन जाती हैं। ज्यामितीय और जैविक आकृतियों का मिश्रण ग्रामीण परिवेश के साधारण लेकिन खास तत्वों को मोज़ाइक की तरह प्रस्तुत करता है।
रंगों और रूपों के माध्यम से कलाकार दर्शकों को एक स्वप्नलोक में ले जाता है, जहां स्मृतियां फिर से जीवित हो उठती हैं। हर ब्रशस्ट्रोक में शांति और संतुलन की अनुभूति होती है। कृतियों में कीट-पतंगों और प्रकृति के सूक्ष्म तत्वों का समावेश यह दर्शाता है कि जैसे वे पारिस्थितिकी का हिस्सा हैं, वैसे ही यादें भी हमारे जीवन के ताने-बाने को आकार देती हैं। कलाकार के अनुसार, “मेरा गाँव सिर्फ एक स्मृति नहीं, बल्कि एक रूपक है—एक ऐसी दुनिया का प्रतीक, जो स्थिरता, सद्भाव और शांति पर आधारित हो।” यह प्रदर्शनी न केवल अतीत की झलक दिखाती है, बल्कि एक बेहतर और संतुलित भविष्य की दिशा भी सुझाती है।

Comment List