राज्य की स्थानीय निकायों के लिए बड़ी चुनौती बन रहा स्वच्छता सर्वेक्षण, मापदंडों के अनुसार कचरा संग्रहण और प्रोसेसिंग को सख्ती से लागू करने की ज़रूरत
जागरूकता बढ़ाने और मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत
स्वच्छता सर्वेक्षण राज्य की स्थानीय निकायों के लिए एक बड़ी चुनौती। सर्वेक्षण में निर्धारित मापदंडों के अनुसार कचरा संग्रहण, पृथक्करण और प्रोसेसिंग की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाना आवश्यक है, लेकिन राजस्थान के कई शहरी निकाय इन मानकों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं।
जयपुर। स्वच्छता सर्वेक्षण राज्य की स्थानीय निकायों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सर्वेक्षण में निर्धारितमापदंडों के अनुसार कचरा संग्रहण, पृथक्करण और प्रोसेसिंग की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाना आवश्यक है, लेकिन राजस्थान के कई शहरी निकाय इन मानकों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि कचरा निस्तारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया को पूर्ण रूप से अपनाने में कमी बनी हुई है। कई स्थानों पर घर-घर से कचरा संग्रहण तो हो रहा है, लेकिन उसका उचित पृथक्करण और प्रोसेसिंग नहीं हो पा रही है।
इसके चलते ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी श्रृंखला प्रभावित हो रही है और सर्वेक्षण में अंक कम मिलने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्वच्छता सर्वेक्षण में राज्य की रैंकिंग प्रभावित हो सकती है। स्थानीय निकायों को कचरा प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने, जागरूकता बढ़ाने और मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही नागरिकों की भागीदारी भी बेहद जरूरी है, ताकि स्वच्छता के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से हासिल किया जा सके।

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