क्योंझर कंकाल मामला: ओडिशा विधानसभा में हंगामा ; विपक्ष ने सरकार को घेरा, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
बैंक में कंकाल ले जाने पर छिड़ा सियासी युद्ध
भुवनेश्वर। ओडिशा के क्योंझर में बहन का कंकाल लेकर बैंक जाने वाले भाई के चौंकाने वाले मामले को लेकर गुरुवार को विधानसभा के विशेष सत्र में भारी हंगामा हुआ। विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। विधानसभा में महिलाओं की भूमिका पर विशेष बहस होनी थी लेकिन विपक्षी सदस्यों ने क्योंझर जिले के मल्लीपासी स्थित ओडिशा ग्राम्य बैंक की शाखा में हुई इस विचलित करने वाली घटना को उठाकर कार्यवाही बाधित कर दी। जैसे ही मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने महिला सशक्तिकरण पर अपना संबोधन शुरू किया, कांग्रेस विधायक पोस्टर और पर्चे लेकर सदन के बीचों-बीच आ गए। वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
गौरतलब है कि खबरों के अनुसार, एक व्यक्ति को अपनी मृत बहन की जमा राशि का दावा करने और उसकी मृत्यु साबित करने के लिए बैंक में कंकाल लाने पर मजबूर होना पड़ा था। मुख्यमंत्री ने सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की और इसे अनुचित आचरण बताया। विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस अमानवीय प्रकरण से ओडिशा की गरिमा को गहरी ठेस पहुँची है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दर्दनाक है कि एक परिवार को अपनी बहन का कंकाल कब्र से खोदकर केवल मृत्यु साबित करने के लिए बैंक तक ढोना पड़ा।
नवीन पटनायक ने आरोप लगाया कि बार-बार चक्कर काटने के बावजूद बैंक अधिकारियों ने मृत्यु प्रमाण के नाम पर भाई को परेशान किया और कंकाल दिखाने के बाद भी उसे पैदल ही वापस ले जाना पड़ा। उन्होंने इस प्रकरण को प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही की कमी का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओडिशा को शर्मसार किया है। बीजद नेता ने बीबीसी और न्यूयॉर्क पोस्ट जैसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज का हवाला देते हुए राज्य सरकार की विफलता की बात कही। उन्होंने कहा कि जिस सरकार की निगरानी में ऐसी घटनाएं होती हैं, उसे महिलाओं की गरिमा या सशक्तिकरण पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री को इस पर आत्ममंथन करने का सुझाव दिया क्योंकि यह उनके गृह जिले की घटना है।
बीजद सदस्यों ने मेज थपथपाकर श्री पटनायक का समर्थन किया, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने पूर्ववर्ती बीजद सरकार के समय के 'दाना माझी मामले' की याद दिलाई, जिसमें एक आदिवासी व्यक्ति को अपनी पत्नी का शव 12 किमी तक कंधे पर ले जाना पड़ा था। इस भावनात्मक बहस ने विशेष सत्र को शासन, महिलाओं की गरिमा और प्रशासनिक जवाबदेही पर एक राजनीतिक युद्धक्षेत्र में बदल दिया।

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