कोटा में प्रसूताओं की मौत प्रकरण : सभी 22 दवाइयां जांच में सही, गुणवक्ता में कमी नहीं

सर्जिकल आइटम्स की रिपोर्ट अभी बाकी

कोटा में प्रसूताओं की मौत प्रकरण : सभी 22 दवाइयां जांच में सही, गुणवक्ता में कमी नहीं

कोटा में प्रसूताओं की मौत प्रकरण में अस्पताल में काम आ रही दवाईयों के सैंपल जांच में सही पाए गए। दवाओं में गुणवत्ता में कोई कमी नहीं मिली है। वहीं दवाओं की बैक्टीरियल एंडोटोक्सिन और स्टेरेलिटी की जांच (दवाओं की बैक्टीरियल इंफेक्शन जांच)में भी कोई गडबड़ नहीं मिली है।

जयपुर। कोटा में प्रसूताओं की मौत प्रकरण में अस्पताल में काम आ रही दवाईयों के सैंपल जांच में सही पाए गए हैं। दवाओं में गुणवत्ता में कोई कमी नहीं मिली है। वहीं दवाओं की बैक्टीरियल एंडोटोक्सिन और स्टेरेलिटी की जांच (दवाओं की बैक्टीरियल इंफेक्शन जांच)में भी कोई गडबड़ नहीं मिली है। कुल 22 दवाईयां प्रसूताओं की मौत के बाद जांच के लिए जयपुर लाई गई थी। दवाओं को जांच रिपोर्ट आने तक उपयोग करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। सोमवार को औषधि नियंत्रक आयुक्तालय को इनकी जांच रिपोर्ट मिल गई है। वहीं प्रसूताओं की सिजेरियन डिलेवरी के लिए जो सर्जिकल आइटम्स काम में आए थे, उनकी जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। दवाओं के सैंपल पास होने के बाद अभी सर्जिकल आइटम्स शंकाओं के घेरे में हैं। मुख्य औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने बताया कि दवाओं में कोई कमी नहीं मिली है। वहीं जिन सर्जिकल आइटम्स का उपयोग प्रसूताओं की सिजेरियन डिलेवरी में किया गया था, उनकी जांच के लिए सैंपल कोलकात्ता भेजे गए हैं। उनकी रिपोर्ट आने में अभी एक सप्ताह लग सकता है। 

ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन घटिया निकला, बेचान पर रोक, लेकिन सिजेरियन डिलेवरी में रोल नहीं
दवाओं के अलावा कोटा से महिलाओं की नॉर्मल डिलेवरी के वक्त यूटर्स में संकुचन (कान्ट्रेक्शन) के लिए काम में लिए जाने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन ( ब्रांड नेम टोसिन)की भी जांच कराई थी। सोमवार को आई जांच रिपोर्ट में इंजेक्शन पूरी तरह घटिया मिला। हालांकि इंजेक्शन में बैक्टीरियल एंडोटोक्सिन व स्टेरेलिटी में सही मिला है, यानी इससे कोई इंफेक्शन नहीं हो सकता, जिससे कोई बीमार पड़े। अजय फाटक ने बताया कि इसमें ऑक्सीटोसिन मिला ही नहीं। दरअसल नॉर्मल डिलेवरी के वक्ता इस इंजेक्शन को यूटर्स संकुचन को काम में लिया जाता है। ताकि डिलेवरी में प्रसूता को आसानी हो। लेकिन इसका उपयोग सिजेरियन डिलेवरी में नहीं किया जाता, क्योंकि  सिजेरियन डिलेवरी में पेट काट कर नवजात को गर्भ से बाहर निकाला जाता है।

ऐसे में प्रसूताओं की मौत के पीछे कारण यह नहीं माना जा रहा। फाटक ने बताया कि इस इंजेक्शन की खरीद कोटा में ही अस्पताल ने लोकल स्तर पर की थी। इसके 16 हजार इंजेक्शन अस्पताल ने खरीदे थे। जिसमें से 12500 इंजेक्शन पहले ही काम आ चुके थे। नॉर्मल डिलेवरी वाली प्रसूताओं कोई इससे परेशानी नहीं हुई थी। अभी बचे 3500 इंजेक्शन को जांच रिपोर्ट के बाद जब्त किया है। इसके तय बैच की बिक्री पर भी पाबंदी लगा दी गई है। ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत अब इसके अमृतसर की निर्माता कंपनी मैसर्स जैक्सन लेबोरेट्रीज प्रा.लि. कार्रवाई की जाएगी। अन्य जगहों से भी इस इंजेक्शन के जांच के सैंपल लेने के आदेश दिए हैं।  

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