भीषण गर्मी से राजस्थान में मई-जून में बिजली डिमांड चरम पर, सप्लाई प्रबंधन में जुटा ऊर्जा विभाग

अफसरों का स्थिति नियंत्रण का दावा

भीषण गर्मी से राजस्थान में मई-जून में बिजली डिमांड चरम पर, सप्लाई प्रबंधन में जुटा ऊर्जा विभाग

प्रचंड गर्मी और बढ़ती बिजली खपत ने राजस्थान में मई-जून में बिजली डिमांड को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। राज्य में इस समय पीक डिमांड 20,000-22,000 मेगावाट के आसपास पहुंच रही है, जबकि पूरे देश में मई में 260 गीगावॉट से ऊपर और जून में 270 गीगावॉट के करीब डिमांड दर्ज।

जयपुर। प्रचंड गर्मी और बढ़ती बिजली खपत ने राजस्थान में मई-जून में बिजली डिमांड को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। राज्य में इस समय पीक डिमांड 20,000-22,000 मेगावाट के आसपास पहुंच रही है, जबकि पूरे देश में मई में 260 गीगावॉट से ऊपर और जून में 270 गीगावॉट के करीब डिमांड दर्ज की जा रही है। राजस्थान ऊर्जा विभाग के अनुसार, इस महीने मुख्य रूप से एसी, कूलर और कृषि पंपों के चलते औसत दैनिक डिमांड में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उपलब्धता और डिमांड के बीच अंतर 1,000-2,000 मेगावॉट तक रह सकता है, जिसके लिए अतिरिक्त खरीद, सोलर जनरेशन और अन्य राज्यों से पावर एक्सचेंज पर निर्भरता बढ़ाई गई है। जून में डिमांड और बढ़ने की संभावना है, खासकर शाम के पीक ऑवर्स में। ऊर्जा विभाग ने रिसोर्स एडिक्वेसी और डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी नियमों के तहत तैयारी की है। आरईआरसी के नए नियमों से डिस्कॉम्स पीक लोड को 400 मेगावॉट तक कम करने का लक्ष्य रख रहे हैं।

शहरी-ग्रामीण उपलब्धता और कटौती: शहरी क्षेत्रों (जयपुर, जोधपुर, उदयपुर आदि) में सप्लाई ज्यादातर निर्बाध है, हालांकि पीक टाइम पर 30-60 मिनट की मामूली कटौती या वोल्टेज फ्लक्चुएशन की शिकायतें आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि फीडरों पर रोटेशनल सप्लाई जारी है, जहां 6-8 घंटे की कटौती सामान्य है। कुछ जिलों में अनियोजित कटौती भी देखी जा रही है, लेकिन विभाग का दावा है कि पिछले रबी सीजन की तरह बड़े स्तर पर लोड शेडिंग से बचा जा रहा है। 

अफसरों का स्थिति नियंत्रण का दावा:
ऊर्जा विभाग के अफसरों का कहना है कि सोलर क्षमता का बेहतर उपयोग, ट्रांसमिशन मजबूती और डिमांड साइड मैनेजमेंट से स्थिति नियंत्रण में रहेगी। बजट 2026-27 में ऊर्जा क्षेत्र के लिए 2,900 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें नए जीएसएस, ग्रिड आधुनिकीकरण और एआई आधारित मॉनिटरिंग शामिल हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि किसानों को निर्बाध सप्लाई जारी रहेगी और उद्योगों को भी न्यूनतम प्रभावित किया जाएगा।विभाग ने थर्मल प्लांट्स की मेंटेनेंस टालने, अतिरिक्त पावर प्रोक्योरमेंट और रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई है। हालांकि, अगर तापमान में और वृद्धि हुई तो चुनौतियां बढ़ सकती हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि पीक ऑवर्स में बिजली बचत करें।

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