इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्प्णी, निजी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को जनगणना कार्य के लिए नहीं कर सकते बाध्य
जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने जनगणना ड्यूटी पर बड़ा फैसला देते हुए निजी स्कूल-कॉलेजों को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक व कर्मचारी जनगणना कार्य के लिए बाध्य नहीं हैं। गौतमबुद्ध नगर डीआईओएस के आदेश पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा।
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनगणना कार्य में निजी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने के मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों-कॉलेजों के शिक्षक व गैर-शैक्षणिक कर्मचारी जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत किसी कार्य के लिए बाध्य नहीं हैं। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि ऐसे संस्थानों के कर्मचारी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के अधीन नहीं आते। इसलिए उन्हें जनगणना कार्य के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने गौतमबुद्ध नगर के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें जिले के सभी सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों से अध्यापकों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की सूची जनगणना कार्य के लिए मांगी गई थी। साथ ही, राज्य सरकार को मामले में चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
यह आदेश ‘इंडिपेंडेंट सेल्फ फाइनेंस्ड स्कूल्स एसोसिएशन’ की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में कहा गया था कि जनगणना अधिनियम की धारा 4ए के अनुसार केवल स्थानीय प्राधिकरणों को कर्मचारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, जबकि निजी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारी इस श्रेणी में नहीं आते।

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