पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की फटकार, 31 जुलाई तक कराएं पंचायत और निकाय चुनाव

'वन स्टेट-वन इलेक्शन' का हवाला देते हुए समय मांगा

पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की फटकार, 31 जुलाई तक कराएं पंचायत और निकाय चुनाव
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है। अदालत ने ओबीसी आयोग को 20 जून तक रिपोर्ट सौंपने और चुनाव आयोग को उसके बाद शेड्यूल जारी करने को कहा है। महाधिवक्ता ने 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' का हवाला देते हुए समय मांगा था।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को कहा है कि वह 31 जुलाई तक प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव कराए। इसके साथ ही अदालत ने ओबीसी आयोग को भी कहा है कि वह 20 जून तक अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है। अदालत ने राज्य चुनाव आयोग को कहा है कि वह 20 जून के बाद अपना चुनाव शेड्यूल जारी करे। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह आदेश पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा की याचिका में राज्य सरकार की ओर से दायर प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए दिए। खंडपीठ ने गत 11 मई को सभी पक्षों को सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

प्रार्थना पत्र में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि अक्टूबर-दिसंबर में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके कार्यकाल समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा और इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा। इसके अलावा कोर्ट के आदेश की पालना के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां ऐसी है कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराना संभव नहीं हो सका। चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी, मौसम, कृषि और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर चुनाव आगे खिसकाने की अनुमति मांगी गई। जिसका विरोध करते हुए अधिवक्ता प्रेमचंद देवदा ने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। 

इसलिए सुप्रीम कोर्ट के सुरेश महाजन के मामले में दिए फैसले के तहत ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना भी पंचायत चुनाव हो सकते हैं।
अदालत ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का पर्याप्त समय दिया था, लेकिन इस अवधि तक निकायों के लिए अंतिम मतदाता सूची ही जारी नहीं की गई। इसके अलावा हाईकोर्ट के 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी। इसलिए यह आदेश अंतिम हो गया है और इसकी पालना की जानी चाहिए।

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